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महंगाई और भ्रष्टाचार के आगे नहीं चली रेवड़ियों की सौगात
हरवीर सिंह/नई दिल्ली
Updated Mon, 09 Dec 2013 01:19 PM IST
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रविवार को आए चार राज्यों के चुनाव नतीजों ने साफ कर दिया कि भ्रष्टाचार, खराब आर्थिक हालात और महंगाई के चलते आम आदमी यूपीए सरकार से बेहद नाराज है।
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सस्ता अनाज और दूसरी वित्तीय सुविधाओं के रूप में बांटी जा रही रेवड़ियां भी लोगों पर असर डालने में नाकाम रही हैं।
यही वजह है कि दिल्ली विधान सभा में समाज के कमजोर वर्ग और उच्च मध्य वर्ग से लेकर मध्य वर्ग की बहुतायत वाली सीटों पर भी कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली है।
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मनरेगा, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सस्ते अनाज, स्कॉलरशिप और पेंशन से लेकर कई तरह की वित्तीय सहायता की योजनाओं और घोषणाओं का दिल्ली, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के वोटरों पर असर नहीं हुआ।
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एक ओर जहां यूपीए दो के कार्यकाल में टूजी स्पेक्ट्रम, कोल ब्लॉक आवंटन, कॉमनवेल्थ खेल, एंट्रिक्स सहित लाखों करोड़ रुपये के कई घोटाले सामने आए तो वहीं दशक में सबसे कमजोर विकास दर के चलते रोजगार और कारोबारी अवसरों में भारी कमी आई है। इनका असर मतदाताओं पर साफ दिखा है।
पिछले करीब तीन साल से दो अंकों में बनी रही खाद्य महंगाई दर को कम करने की सरकार की नाकामी ने समाज के हर वर्ग को नाराज कर दिया।
पेट्रोलियम उत्पादों से लेकर प्याज, दूध, फल और सब्जियों की कीमतों में भारी तेजी ने सरकार को मतदाताओं के निशाने पर ला दिया।
दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाया और दिल्ली की निवर्तमान मुख्य मंत्री शीला दीक्षित पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए।
यूपीए सरकार पर ठप्पा लग गया है कि वह आर्थिक फैसले नहीं ले रही है और उसके चलते विकास नहीं हो रहा है। रोजगार के अवसर पैदा नहीं हो पा रहे हैं।
इन आरोपों का कोई पुख्ता जवाब कांग्रेस के पास नहीं था। यही वजह है कि शहरी मध्य वर्ग से लेकर समाज के कमजोर वर्ग तक उसकी पकड़ ढीली हो गई और नतीजे कांग्रेस की उम्मीदों के उलट आए।