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उद्योगों-बैंकों को ब्याज दर में कटौती की उम्मीद

Mon, 02 Feb 2015 09:07 PM IST
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया Updated Mon, 02 Feb 2015 09:07 PM IST
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Industry-banks expect rate cut from RBI

उद्योग और कारोबार जगत ब्याज दर में कटौती की उम्मीद के साथ मंगलवार को पेश होने वाली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति की समीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि सुधार की राह पर बढ़ रही देश अर्थव्यवस्था और महंगाई के नियंत्रण में होने को देखते हुए आरबीआई ब्याज दर में कटौती की घोषणा कर सकता है।

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ब्याज दर में कटौती को लेकर आर्थिक और वित्तीय क्षेत्र से जुड़े कई तरह के आंकड़ों की चर्चा की जा रही है। महंगाई के नियंत्रण में होने और विनिवेश की प्रक्रिया के सही दिशा में आगे बढ़ने के बीच अनुमान जताया जा रहा है कि रिजर्व बैंक रेपो दर में चौथाई (0.25) से लेकर तीन चौथाई (0.75) फीसदी की कटौती कर सकता है। आरबीआई अगर यह कटौती करता है, तो बैंकों के लिए होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन जैसे कर्जों की ब्याज दरों में कमी करने की गुंजाइश बन सकेगी।
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बीते माह की गई चौथाई फीसदी की प्रतीकात्मक कटौती के बाद अगर रिजर्व बैंक एक बार फिर से रेपो रेट घटाता है, तो औद्योगिक क्षेत्र को सस्ता कर्ज मिलने की राह खुल जाएगी। ऐसे में यह कदम अर्थव्यवस्था को गति देने में भी सहायक होगा।
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बीते सप्ताह सरकार द्वारा कोल इंडिया में अपनी 10 फीसदी हिस्सेदारी के विनिवेश के जरिए 22,577 करोड़ रुपये जुटाए जाने से राजकोषीय घाटे के बोझ में भी कमी आई है। ऐसे में बैंकरों, आर्थिक विश्लेषकों और उद्योग जगत का मानना है कि रिजर्व बैंक 15 जनवरी को रेपो दर को 8 फीसदी से घटाकर 7.75 फीसदी पर लाने के बाद इस दिशा में एक कदम और बढ़ाकर मंगलवार को ब्याज दर में एक और कटौती की घोषणा कर सकता है।


गौरतलब है कि 20 माह तक ब्याज दर को यथावत रखने के बाद 15 जनवरी को रेपो रेट घटाते वक्त रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने कहा था कि ब्याज दर में आगे कटौती करने की संभावना महंगाई और अर्थव्यवस्था के वित्तीय हालात पर निर्भर करेगी। चौथाई फीसदी की कटौती को उद्योग, कारोबार और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों ने नाकाफी बताते हुए और ब्याज दर में और कमी किए जाने की जरूरत जताई थी। इसे देखते हुए मंगलवार की मौद्रिक समीक्षा में आरबीआई की ओर से नरमी भरा रवैया जताए जाने के आसार जताए जा रहे हैं।

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