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उद्योगों को भरोसा, सुधरेंगे आर्थिक हालात
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
Updated Mon, 12 Nov 2012 08:47 PM IST
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मुश्किल और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही देश की अर्थव्यवस्था को लेकर भारतीय उद्योगों का नजरिया ‘आशावादी’ है। सरकार की ओर से हाल में उठाए गए आर्थिक सुधार के उपायों को आर्थिक विकास के लिए सकारात्मक पहल बताते हुए उद्योगों ने भ्रष्टाचार और नौकरशाही पर गहरी चिंता जताई है। उद्योग संगठन सीआईआई और मैकेंजी एंड कंपनी की ओर से देश की प्रमुख कंपनियों के सीएफओ के बीच कराए एक सर्वे में मौजूदा आर्थिक हालात और उसके पूर्वानुमान को लेकर कमोबेश इसी तरह के आकलन सामने आए हैं।
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मैन्यूफैक्चरिंग, आईटी, कंसल्टेंसी और फाइनेंशियल सर्विसेज सहित विभिन्न सेक्टरों के 32 सीएफओ ने सर्वे में भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति सकारात्मक रुझान दिखाया है। उनका मानना है कि विदेशी निवेश में बढ़ोतरी, वित्तीय घाटा घटने और कॉरपोरेट की विकास दर अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में प्रमुख कड़ी साबित होंगे। हालांकि, 67 फीसदी सीएफओ का कहना है कि आने वाले वर्ष में देश की जीडीपी 6 फीसदी से कम रहेगी। रुपये की स्थिति को लेकर सर्वे में शामिल 86 फीसदी सीएफओ की राय है कि 2013 में भारतीय मुद्रा 50-55 रुपये प्रति डॉलर के बीच रहेगी।
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लंबे समय से चिंता का सबब बनी महंगाई से आगे भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिखाई दे रही है। 50 फीसदी से अधिक सीएफओ की साफ तौर पर कहना है कि 2013 में महंगाई दर 6-8 फीसदी के बीच बनी रहेगी। हालांकि, एफडीआई में वृद्धि, वित्तीय घाटे पर अंकुश, ढांचागत सुधार के जरिए कारोबार विकास पर फोकस नजरिया और आसान नीतियों के जरिए घरेलू अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा।
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सर्वे में शामिल सीएफओ ने भले ही आर्थिक सुधार के उपायों की सराहना की हो, लेकिन भ्रष्टाचार और नौकरशाही को वह चिंताजनक मानते हैं। 100 फीसदी सीएफओ ने जीएसटी और नए कंपनी कानून को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया है। उनका कहना है कि इनका कारोबार पर व्यापक असर होगा, हालांकि यह कितने समय में प्रभावी हो पाते है, इसको लेकर अनिश्चितता की स्थिति जरूर है। जनरल एंडी एवायडेंस रूल्स (गार) पर उद्योगों का नजरिया काफी सतर्कतापूर्ण रहा। सर्वे में शामिल 52 फीसदी सीएफओ का मानना है कि गार सरकार का गलत दिशा उठाया गया कदम है, इससे कारोबारी माहौल पर विपरीत असर होगा।
कंपनियों को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
कंपनियों के प्रदर्शन में सुस्ती के बावजूद अधिकांश सीएफओ ने भरोसा जताया है कि पिछले साल के मुकाबले कंपनियों की स्थिति में सुधार आएगा। सर्वे में शामिल 81 फीसदी सीएफओ को उम्मीद है कि उनकी कंपनी की टॉप लाइन ग्रोथ कमोबेश पिछले साल की तरह या उससे अधिक होगी, जबकि 69 फीसदी ने अनुमान जताया कि उनकी कंपनियों के शुद्ध मुनाफे में कोई खास बदलाव नहीं आएगा। उनका कहना है कि कारपोरेट इंडिया के लिए विकास दर में गिरावट एक सबसे बड़ी चुनौती है। आने वाले साल में कीमतों में कमी, नए उत्पाद लाना और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना उनकी शीर्ष प्राथमिकता होगी।
ग्लोबल उथल-पुथल का पड़ेगा असर
सर्वे के मुताबिक, ग्लोबल अर्थव्यवस्था की विकास दर आने वाले वर्ष में लगभग सपाट रहेगी। ग्लोबल स्तर होने वाली प्रमुख घटनाओं का भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर दिखाई देगा। सर्वे में शामिल 50 फीसदी सीएफओ का मानना है कि आने वाले साल में ग्लोबल अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर सपाट रहेगी। यूरो संकट, अमेरिकी मंदी और तेल कीमतों में बढ़ोतरी का घरेलू अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर देखने को मिल सकता है।