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कम है भारत का प्रदर्शन, आगे बढ़ने का मौका
नई दिल्ली/ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Jun 2014 03:25 AM IST
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विश्व बैंक का मानना है कि दुनिया के कई विकासशील देशों की तरह आर्थिक मोर्चे पर भारत का प्रदर्शन हाल के दिनों में अपनी क्षमता से कम रहा है। ऐसे में देश के सामने महंगाई का दबाव बढ़ाए बिना आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाकर आर्थिक विकास दर में तेजी लौटाने का अच्छा अवसर है।
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दुनिया के आर्थिक हालात पर ग्लोबल इकनॉमिक प्रास्पेक्ट-2014 शीर्ष से सालाना रिपोर्ट जारी करते हुए विश्व बैंक ने वित्त वर्ष 2014-15 में देश की आर्थिक विकास दर 5.5 फीसदी रहने की बात फिर से कहते हुए 2015-16 में इसके 6.3 फीसदी और 2016-17 में 6.6 फीसदी पर पहुंचने का अनुमान जताया है।
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विश्व बैंक द्वारा आगामी वर्षों में देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में बढ़ोतरी की बात कहना इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि ज्यादातर विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था सपाट है।
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रिपोर्ट में इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं के संकट से उबर कर अपनी क्षमता के अनुरूप सुधार की ओर बढ़ने की बात कही गई है। भारत को भी दुनिया के ऐसे ही विकासशील देशों में शामिल किया गया है।
रिपोर्ट में विश्व बैंक ने कहा है कि इस साल समय के साथ ग्लोबल अर्थव्यवस्था में भी मजबूती लौटती हुई दिखाई देगी और चालू वित्त वर्ष में वैश्विक अर्थ व्यवस्था की विकास दर 2.8 फीसदी के स्तर पर रहेगी।
अगले दो वित्त वर्षों के दौरान इसके सुधर कर क्रमश: 3.4 फीसदी और 3.5 फीसदी के स्तर पर पहुंचने का अनुमान भी रिपोर्ट में जताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक ऊंची आय वाले देशों की अर्थव्यवस्था का योगदान ग्लोबल अर्थव्यवस्था में 50 फीसदी के करीब पहुंच जाएगा।
वर्ष 2013 में इन देशों का योगदान 40 फीसदी के करीब था। विकसित देशों द्वारा ग्लोबल अर्थव्यवस्था में अगले तीन वर्षों में 63 खरब डॉलर झोंकने की बात रिर्पो में कही गई है। बीते तीन वर्षों में यह रकम 39 खरब डॉलर के करीब थी।