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मंदी में भारतीय देख रहे हैं तरक्की के नए अवसर

Thu, 29 Nov 2012 09:23 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 29 Nov 2012 09:23 PM IST
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indians are looking new opportunities for growth in recession

दुनियाभर में मची आर्थिक उथल-पुथल और ग्लोबल मंदी को लेकर भारतीयों को रवैया काफी सकारात्मक है। भारतीयों का ऐसा मानना है कि वैश्विक मंदी ने उनके लिए अवसरों की नई राहें खोली हैं।

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बार्कलेज की ओर से हाल में 2,000 से अधिक अति संपन्न व्यक्तियों के बीच कराए गए सर्वे के मुताबिक, मौजूदा वैश्विक मंदी को लेकर भारतीयों में निराशा या हताशा जैसी स्थिति नहीं है। सर्वे में शामिल 81 फीसदी भारतीयों का मानना है कि ग्लोबल मंदी ने उनके लिए अधिक अवसर विकसित किए हैं। बार्कलेज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, धनाढ्य भारतीयों का मानना है कि यदि किसी व्यक्ति के उद्यमशीलता के शुरुआती प्रयास विफल साबित रहे हैं, तो यह मुश्किल समय के लिए बेहतर अनुभव साबित हो सकते हैं।
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सर्वे में शामिल 91 फीसदी भारतीयों का कहना है कि वह उस व्यक्ति को नौकरी देना पसंद करेंगे, जो अनुभवी विफल उद्यमी रहा हो। जबकि, ब्रिटेन की बात की जाएं, तो वहां सिर्फ 42 फीसदी व्यक्ति ही ऐसी राय रखते हैं। बार्कलेज की रिपोर्ट के मुताबिक, तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में संपन्न लोगों का रवैया आर्थिक झटकों या सुस्ती को लेकर अधिक सकारात्मक है। इससे स्पष्ट है कि इनमें विपरीत परिस्थितियों को काबू में करने की बेहतर क्षमता है और वह इसके फायदे को अच्छी तरह समझते हैं।
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बार्कलेज इंडिया के वेल्थ एंड इनवेस्टमेंट मैनेजमेंट डिविजन के सीईओ सत्य नारायण बंसल का कहना है कि यह देखते हुए कि हमारे अधिकांश ग्राहकों ने उद्यमशीलता के जरिये संपत्ति बनाई है, यह महत्वपूर्ण है कि उनकी जोखिम उठाने और विफलता का सामना करने की क्षमता कितनी है, चाहे यह बिजनेस हो या निवेश। यह बेहद रोचक है कि, सर्वे में शामिल भारत के 81 फीसदी व्यक्तियों का मानना है कि हाल की मंदी ने उनके लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराए और इससे विफलता के प्रति उनका रवैया सकारात्मक हुआ है। जबकि, सऊदी, जापान और चीन में ऐसी राय रखने वालों का आंकड़ा क्रमश: 21, 22 और 27 फीसदी है।

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