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मूडीज एनलिटिक्स ने बढ़ाया विकास दर का अनुमान
नई दिल्ली/ एजेंसी
Updated Fri, 17 Apr 2015 07:37 PM IST
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ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज की सहायक कंपनी मूडीज एनालिटिक्स ने चालू वित्त वर्ष (2015-16) में देश की आर्थिक विकास दर में मामूली वृद्धि का अनुमान जताया है। मूडीज एनालिटिक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत की आर्थिक विकास दर इस साल पिछले वर्ष के 7.2 फीसदी के मुकाबले बढ़कर 7.3 फीसदी रह सकती है।
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मूडीज एनालिटिक्स ने अपने अध्ययन में कहा है कि अर्थव्यवस्था पर नजर रखने वाली हमारी प्रणाली के मुताबिक भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.3 फीसदी के करीब रहेगी। पिछली कुछ तिमाहियों के दौरान सुस्ती दिखाई देने के बावजूद उम्मीद है कि आगे चलकर घरेलू स्तर पर मांग में मजबूती आने पर 2015 की आर्थिक विकास दर 7.3 फीसदी के स्तर पर पहुंच जाएगी।
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रिपोर्ट के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था तेजी की ओर बढ़ती दिख रही है और आने वाले दिनों में घरेलू मांग में बढ़ोतरी होने के संकेत मिल रहे हैं। महंगाई में नरमी ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को ब्याज दरों में आधे फीसदी की कटौती करने का मौका दिया और कर्ज सस्ता होने से कॉरपोरेट सेक्टर का बोझ हल्का हुआ है। ऐसे में कर्ज की घटी ब्याज दरें और इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास और सार्वजनिक क्षेत्र कंपनियों के विनिवेश पर सरकार के जोर से घरेलू मांग पर आधारित उद्योगों में तेजी देखने को मिलेगी। इसके अलावा सरकार द्वारा निजी-सार्वजनिक भागेदारी (पीपीपी) में बढ़ोतरी और विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की नीति भी विकास दर को तेज करने में सहायक साबित होगी।
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इससे पहले इसी सप्ताह विश्व बैंक और अंतर राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) भी अपनी-अपनी रिपोर्टों में भारत की आर्थिक विकास दर में बढ़ोतरी का अनुमान जता चुके हैं। विश्व बैंक द्वारा चालू वित्त वर्ष में 7.5 फीसदी की विकास दर का अनुमान जताए जाने के बाद आईएमएफ ने भी इतनी ही विकास दर की बात कही। इसके साथ ही आईएमएफ ने आर्थिक विकास में भारत के चीन से आगे निकल कर दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने की बात भी कही है।
दोनों ही वैश्विक संस्थाओं ने जीडीपी में इस बढ़ोतरी का श्रेय केंद्र की नई सरकार द्वारा हाल के महीनों में आर्थिक सुधार को आगे बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदमों को दिया है। सरकार के नीतिगत कदमों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के लगातार निचले स्तर पर बने रहने का लाभ भी अर्थव्यवस्था को मिलने की बात कही गई है।