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इकोनॉमी पर भारी डॉलर सुनामी
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Thu, 20 Jun 2013 10:10 PM IST
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अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीदों से आई डॉलर सुनामी ने रुपये को गर्त में धकेल दिया है।
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बैंक और आयातकों की तरफ से डॉलर की भारी मांग के चलते बृहस्पतिवार को रुपया 60 के करीब 59.93 रुपये प्रति डॉलर के ऐतिहासिक स्तर तक जा गिरा।
अंत में पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले 87 पैसे की भारी गिरावट लेकर 59.57 पर बंद हुआ। रुपये की पतली हालत और जरूरत से ज्यादा बारिश महंगाई की आग को और ज्यादा भड़का सकती है।
बुधवार को अमेरिका के फेडरल बैंक के प्रमुख बेन बर्नांके की ओर से राहत पैकेज में कटौती संबंधी बयान के बाद रुपये समेत एशिया की ज्यादातर मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में मजबूती का रुख रहा।
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सबसे ज्यादा हालत रुपये की खराब हुई है। दिन में मामूली सुधार के बाद रुपया 87 पैसे की गिरावट के साथ 59.57 पर बंद हुआ। पिछले दिवस रुपया 58.70 के स्तर पर रहा था।
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सलाहकार फर्म इंडिया फॉरेक्स के अध्यक्ष अभिषेक गोयनका ने आशंका जताई कि निकट भविष्य में रुपया 61 तक जा सकता है, क्योंकि रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप की उम्मीद कम है।
हालांकि, आरबीआई पर डॉलर बेचने का दबाव बढ़ गया है लेकिन उसके पास सिर्फ 283 अरब डॉलर का फॉरेक्स रिजर्व है जो केवल सात महीने के आयात की पूर्ति करेगा। ऐसे में आरबीआई के लिए ज्यादा डॉलर बेचने की राह आसान नहीं है।
किस पर क्या होगा असर
फिर महंगा होगा पेट्रोल-डीजल
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से पेट्रोल-डीजल के दाम एक बार फिर बढ़ सकते हैं। देश की जरूरत के अधिकांश पेट्रोलियम उत्पाद आयात होते हैं। रुपये की कमजोरी का सबसे ज्यादा असर ईंधन की कीमतों पर ही पड़ेगा। रुपये की कमजोरी के चलते हाल ही में पेट्रोल के दाम में 2.40 रुपये का इजाफा हुआ है। अब तेल कंपनियां दोबारा दाम बढ़ा सकती है। इसका असर खाने-पीने की चीजों की महंगाई पर भी पड़ना तय है।
विदेशी शिक्षा 25 फीसदी महंगी
विदेशी विश्वविद्यालय डॉलर में फीस लेते हैं। रुपये की कमजोरी से इस साल विदेशी शिक्षा 25 फीसदी तक महंगी हो गई है। विदेश खासकर अमेरिका में रहने-खाने का खर्च भी इसी अनुपात में बढ़ा है। इससे देश के निजी विश्वविद्यालय को थोड़ा लाभ मिल सकता है। महंगी विदेशी शिक्षा के चलते देसी संस्थानों की रौनक बढ़ सकती है। बाकी देशों के छात्र भी सस्ती पढ़ाई के लिए भारत का रुख करेंगे।
विदेशी सैर का खर्च बढ़ा
विदेश में सैर-सपाटे का खर्च भी कमजोर रुपये के साथ बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों में भारत की हिस्सेदारी बढ़ी है, लेकिन अब इसे झटका लग सकता है। डॉलर मजबूत होने के बाद दक्षिण-पूर्व एशिया के थाईलैंड और मलयेशिया जैसे देशों में सैलानियों की तादाद बढ़ सकती है।
मकान बनाना होगा महंगा
अब घर बनाना भी और महंगा हो सकता है। देश में बड़े पैमाने पर स्क्रैप का आयात किया जाता है। रुपये की कमजोरी से निर्माण में इस्तेमाल होने वाला सरिया महंगा होने की आशंका है।
इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो, न्यूजप्रिंट भी महंगे
आयात पर निर्भर इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, अखबारी कागज और फार्मा उद्योग पर भी रुपये की गिरावट का असर पड़ेगा। कई इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद बनाने वाली कंपनियों ने कीमतें बढ़ानी शुरू कर दी हैं। रुपये की हालिया गिरावट इस सिलसिले को तेज कर सकती है।
देसी उद्योगों के लिए मौका
महंगा आयात घरेलू उद्योगों के लिए बड़ा मौका साबित हो सकता है। जिन देसी उद्योगों को सस्ते निर्यात से मुकाबला करना पड़ रहा है, उनके लिए बाजार के रास्ते अब खुल सकते हैं।