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मूडीज ने जताई जीडीपी में मजबूती लौटने की उम्मीद

Thu, 22 Nov 2012 09:27 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Thu, 22 Nov 2012 09:27 PM IST
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indian economy could have grown says moodys

अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज ने आने वाले दिनों के लिए भारत की अर्थव्यवस्था की अच्छी तस्वीर पेश की है। उसने वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर 5.5 से कुछ अधिक रहने की संभावना जताई है।

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एजेंसी ने कहा है कि सरकार द्वारा पिछले दिनों आर्थिक सुधार की दिशा में उठाए गए कदमों ने निवेशकों के मन की आशंकाओं को काफी हद तक खत्म कर दिया है और ढांचागत क्षेत्र की बुनियादी समस्याएं भी अब निराकरण की ओर बढ़ती दिख रही हैं। इससे जीडीपी की विकास दर के पटरी पर लौट आने के स्पष्ट आसार बनते दिख रहे हैं।
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मूडीज ने कहा है कि सरकार की ओर से उठाए गए सुधारात्मक कदम अर्थव्यवस्था से जुड़े जोखिमों को कम करने में सक्षम हैं। हालांकि यह तत्काल देश के आर्थिक परिदृश्य में कोई बड़ा बदलाव नहीं कर सकते क्योंकि अर्थव्यवस्था अब भी दीर्घावधि की अपनी क्षमताओं से कमतर प्रदर्शन ही कर रही है।
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30 नवंबर को सरकार की ओर से जुलाई-सितंबर तिमाही के आर्थिक आंकड़े जारी किए जाने से एक सप्ताह पहले जारी अपनी रिपोर्ट में उत्साह बढ़ाने वाली कई बातें कही हैं। मूडीज ने कहा है कि अंतिम तिमाही में जीडीपी की विकास दर 5.5 फीसदी से कुछ ज्यादा रह सकती है, जोकि 2012 की पहली दो तिमाहियों के आसपास ही होगी, पर सालाना आधार पर देखा जाए तो यह एक साल पहले के जीडीपी के स्तर से नीचे होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक आगामी आंकड़े देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ी मौजूदा चुनौतियों को रेखांकित करने वाले होंगे, पर साथ ही यह आने वाले समय में अर्थ व्यवस्था के एक बार फिर से पटरी पर लौटते हुए अपनी पुरानी विकास दर की ओर बढ़ने का संकेत भी देंगे।

हमारा आकलन है कि आने वाली तिमाही में अर्थव्यवस्था में बढ़त की ओर बढ़ने का रुझान दिखाई देगा और 2014 की पहली छमाही तक यह अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करने की स्थिति में वापस लौट आएगी। मूडीज का अनुमान है कि भारत 2014 के अंत तक 7 से 7.5 फीसदी की विकास दर दोबारा हासिल कर लेगा। हालांकि उसने सरकार के बढ़ते वित्तीय घाटे को लेकर भी चिंता जताई है।

मूडीज का अनुमान है कि इस साल वित्तीय घाटा जीडीपी का 6 फीसदी तक रह सकता है, जबकि सरकार इसे घटाकर 5.3 फीसदी पर लाने के बजटीय लक्ष्य को हासिल कर लेने बात कर रही है। मूडीज ने ये भी कहा है कि सरकार ने हाल में आर्थिक सुधारों से जुड़े जो बड़े फैसले लिए है वो लंबे वक्त में भारत के लिए अच्छे हैं और कुछ सालों बाद उनका ठोस असर दिखाई देना शुरू हो जाएगा।


गौरतलब है कि 2008 में शुरू हुई आर्थिक सुस्ती की चपेट में आने से पहले देश की अर्थव्यवस्था आठ से नौ फीसदी तक की आर्थिक विकास दर को हासिल करने में कामयाब रही थी। ग्लोबल स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच 2011 में देश की विकास दर गिरकर 6.5 फीसदी के स्तर पर आ गई, जोकि पिछले नौ सालों का सबसे निचला स्तर रहा।

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