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कमाई घर भेजने में भारतीय सबसे आगे
एजेंसी/वाशिंगटन
Updated Thu, 03 Oct 2013 06:48 PM IST
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कमाई घर भेजने के मामले में भारतीय दुनिया में सबसे आगे हैं।
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विश्व बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2013 में विदेशों में काम कर रहे भारतीय मूल के लोगों ने करीब 71 अरब डॉलर की कमाई अपने देश भेजी। यह रकम 2012 में देश को मिलने वाले कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की करीब तीन गुनी है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी कमाई (रेमिटेंस) प्राप्त करने में भारत के बाद दूसरा नंबर चीन का रहा, जिसके हिस्से में 60 अरब डॉलर की रकम आई।
इसके अलावा फिलीपींस में 26 अरब डॉलर, मेक्सिको में 22 अरब डॉलर, नाइजीरिया में 21 अरब डॉलर व मिस्र में 20 अरब डॉलर भेजे गए। विदेशी कमाई पाने वाले टॉप-10 देशों की सूची में पाकिस्तान, बांग्लादेश, वियतनाम और यूक्रेन भी शामिल हैं।
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हालांकि देशों के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के हिसाब से देखा जाए तो रेमिटेंस के मामले में जातिकिस्तान टॉप पर रहा, जिसे मिलने वाली विदेशी कमाई की रकम उसकी जीडीपी के 48 फीसदी के बराबर रही।
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इसके बाद किर्गिज गणराज्य 31 फीसदी, लेसोथो व नेपाल 25 फीसदी व मालडोवा 24 फीसदी के साथ रहे।
वर्ल्ड बैंक के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने कहा कि इस रिपोर्ट से हमें पता चलता है कि विदेशों में कमाई से हासिल होने वाली रहम देशों की अर्थव्यवस्था के लिए कितनी महत्वपूर्ण होती हैं।
उन्होंने कहा कि ताजिकिस्तान जैसे देशों के लिए यह रकम बहुत ही मायने रखती है, क्योंकि यह उनके सकल घरेलू उत्पाद के 50 फीसदी के करीब है। बांग्लादेश जैसे देश में भी यह गरीबी से सुरक्षा में एक अहम भूमिका निभाती है।
बसु ने कहा कि रेमिटेंस की रकम की अहमियत खासतौर पर ऐसे वक्त में देखने को मिलती है, जब किसी देश में पूंजी का प्रवाह घट जाता है। ऐसे में यह रकम देश के विदेशी मुद्रा भंडार के लिए काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।
हाल ही में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा बांड खरीद बंद करने का संकेत दिए जाने के वक्त कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी।
इसके अलावा देश की मुद्रा के कमजोर पड़ने की स्थिति में भी रेमिटेंस की रकम अर्थव्यवस्था के लिए खासी मददगार साबित होती है। ऐसे में इसके जरिए आने वाली मुद्रा भी उसी अनुपात में बढ़ जाती है, बढ़ी हुई यह नकदी अर्थव्यवस्था में एक तरह से संतुलन स्थापित करने का काम करती है।
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक भारत और चीन दुनिया के विकासशील देशों में भेजी जाने वाली कमाई की कुल रकम का करीब एक तिहाई हासिल करेंगे।
विकासशील देशों में भेजी जा रही विदेशी कमाई की रकम सालाना नौ फीसदी की दर से बढ़ रही है और 2016 तक इसके 540 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच जाने का अनुमान है।
दूसरी ओर विकसित देशों में भेजी जा रही रेमिटेंस की रकम करीब 550 अरब डॉलर की है और 2016 तक इसके 707 अरब डॉलर पर पहुंच जाने की उम्मीद है।