आगरा समिट: नए कारोबार की राह हुई आसान

आगरा/अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 29 Jan 2013 12:10 AM IST
विज्ञापन
india to become manufacturing hub says anand sharma

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
देश में कारोबारी माहौल को बेहतर बनाने और निवेशकों व नए कारोबारियों के लिए कारोबार शुरू करने की राह आसान करते हुए ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट के तहत सरकार ने एक ऑनलाइन बिजनेस पोर्टल गवर्मेंट टू बिजनेस (जी2बी) लांच किया है। बिजनेस शुरू करने के लिए जरूरी तमाम विभागों और नियामकों के नियम-कायदे और प्रक्रियाओं की जानकारी इस पोर्टल पर उपलब्ध होगी। जिससे नए कारोबारियों की समय और लागत की बचत हो सकेगी।
विज्ञापन


आगरा में आयोजित सीआईआई पार्टनरशिप समिट में वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने इस ई-बिज पोर्टल को लांच किया। देश में नया कारोबार शुरू करने के लिए तमाम विभागों और नियामकों से कई तरह की मंजूरियां लेनी पड़ती हैं। इनसे जुड़ी सभी जानकारियां अलग-अलग विभागों की वेबसाइट पर अलग-अलग उपलब्ध है।


इस दौरान कारोबार शुरू करने वाले को आवश्यक मंजूरियों के लिए मध्यस्थों और बिचौलियों से भी संपर्क करना पड़ता है। इससे जहां समय अधिक लगता है, वहीं लागत भी बढ़ जाती है। इन तमाम दिक्कतों को देखते हुए और निवेशकों के लिए देश में बेहतर माहौल बनाने के उद्देश्य से औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने यह ई-बिज पोर्टल पेश किया है। इस पोर्र्टल इनफोसिस के साथ मिलकर पीपीपी मॉडल के तहत विकसित किया गया है।

इस प्रोजेक्ट के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य अपनी सोच को ‘विभागीय केंद्रित’ से ‘ग्राहक केंद्रित’ करना है। ई-बिज पोर्टल पर 24 घंटे सूचनाएं व सेवाएं उपलब्ध होंगी। सभी तरह की मंजूरियों, अनुमतियों आदि के लिए ग्राहक द्वारा आवेदन जमा करने के बाद स्वत: सरकारी एजेंसियों की तरफ से सेवाएं तर्कसंगत रूप से मिल सकेंगी।

चालान और जरूरी भुगतान के लिए इस पोर्टल पर पेमेंट गेटवे भी उपलब्ध होगा। इस मौके पर वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि हम देश में कारोबारी माहौल को बढ़ावा देने के लिए व्यापक पहल करने के प्रति प्रतिबद्ध हैं। हमारा उद्देश्य पारदर्शिता लाने, क्षमता बढ़ाने और सुविधाएं बेहतर करने के लिए प्रणाली को तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है।

इस प्रोजेक्ट को 10 साल के लिए पेश किया गया है। पहला तीन साल पायलट प्रोजेक्ट होगा, जबकि बाकी के सात साल इसे विस्तार दिया जाएगा। पायलट प्रोजेक्ट के दौरान 50 सेवाएं (26 केंद्र सरकार की व 24 राज्य सरकारों की) उपलब्ध होंगी। इन्हें पांच राज्यों आंध्र प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में शुरू किया जाएगा।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X