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भारत में 22 फीसदी बढ़ी धनकुबेरों की संख्या
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Wed, 19 Jun 2013 10:20 PM IST
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घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्था भले ही चुनौतियों से जूझ रही हो लेकिन इसका दुनिया और देश में बढ़ते धनकुबेरों की संख्या पर कोई असर नहीं है।
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पिछले साल 2012 में दुनिया में करोड़पतियों की संख्या बढ़कर 1.2 करोड़ और इनकी कुल संपत्ति 462 खरब डॉलर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई।
हांगकांग के बाद भारत में सबसे तेजी से धनकुबेरों की संख्या बढ़ी है। पिछले साल भारत में अति संपन्न व्यक्तियों की संख्या में 22.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
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कैपजैमिनी एवं आरबीसी वेल्थ मैनेजमेंट द्वारा जारी वर्ल्ड वेल्थ रिपोर्ट : 2013 के मुताबिक, दुनिया के अति संपन्न व्यक्तियों की निवेश योग्य संपत्ति 2012 में 10 फीसदी बढ़कर 462 खरब डॉलर की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई।
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इससे पहले, 2011 में इसमें 1.7 फीसदी की गिरावट आई थी। साथ ही साथ पिछले साल वैश्विक धनकुबेरों की आबादी करीब 10 लाख बढ़कर 1.2 करोड़ हो गई। धनकुबेरों के संख्या की वृद्धि दर 9.2 फीसदी रही।
कैपजेमिनी ग्लोबल फाइनेंशियल्स के चीफ सेल्स एवं मार्केटिंग अधिकारी जीन लैसीग्नार्डी का कहना है कि 2012 में अति संपन्न व्यक्तियों की आबादी में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है।
हालांकि, धनकुबेरों की आबादी और संपत्ति के लिहाज से उत्तरी अमेरिका सबसे आगे रहा लेकिन भविष्य में एशिया-प्रशांत क्षेत्र एक बार फिर से इसे पीछे छोड़ सकता है। 2012 में नार्थ अमेरिका के अति संपन्न व्यक्तियों की आबादी 37.3 लाख रही, जबकि एशिया-प्रशांत में यह संख्या 36.8 लाख दर्ज की गई।
वहीं, इस दौरान नार्थ अमेरिका के धनकुबेरों की संपत्ति 127 खबर डॉलर पहुंच गई, जबकि एशिया-प्रशांत के धनाढ्यों की संपत्ति 120 खरब डॉलर से अधिक हो गई।
हालांकि, वैश्विक स्तर पर धनकुबेरों की कुल संपत्ति की वृद्धि दर की बात की जाए तो एशिया-प्रशांत क्षेत्र की वृद्धि 12.2 फीसदी रही, जबकि नार्थ अमेरिका की वृद्धि दर 11.7 फीसदी दर्ज की गई।
एशिया-प्रशांत देशों के बीच हांगकांग के अति संपन्न व्यक्तियों के संख्या की वृद्धि दर सबसे अधिक 35.7 फीसदी रही। इसके बाद भारत की धनाढ्यों की आबादी 22.2 फीसदी की दर से बढ़ी।