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खाद्य सुरक्षा के मामले में भारत 66वें नंबर पर

Thu, 27 Sep 2012 12:58 AM IST
नई दिल्ली/अजीत सिंह
नई दिल्ली/अजीत सिंह Updated Thu, 27 Sep 2012 12:58 AM IST
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india ranked 66th in terms of food security
भारत में करोड़पतियों की संख्या भले ही बढ़ रही हो, लेकिन खाद्य सुरक्षा के मामले में भारत दुनिया के 105 देशों में 66वें नंबर पर है। इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंट यूनिट के विश्व खाद्य सुरक्षा सूचकांक में अमेरिका अव्वल है जबकि चीन, वियतनाम और श्रीलंका भी क्रमश: 55वां और 62वां स्थान के साथ भारत से बेहतर स्थिति में हैं। अमेरिका के अलावा डेनमार्क, नार्वे और फ्रांस सबसे ज्यादा खाद्य सुरक्षित देशों में शुमार किए गए हैं, जबकि अफ्रीका के कांगो, चाड और हैती खाद्य सुरक्षा के मामले में सबसे पिछड़े हुए हैं।
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इस सूचकांक को तैयार करवाने वाली डूपोंट कंपनी के कार्यकारी उपाध्यक्ष जेम्स सी बोरेल ने कहा कि खाद्य की उपलब्धता के अलावा भोजन खरीदने की क्षमता और इसकी गुणवत्ता को भी इस सूचकांक में महत्व दिया गया है। सूचकांक में भारत के प्रदर्शन के बारे में इकनोमिक इंटेलिजेंट यूनिट की क्षेत्रीय निदेशक प्रतिभा ठाकर ने बताया कि खाद्य उपलब्धता के मामले में भारत की स्थिति थोड़ी बेहतर है और वह 52वें स्थान पर है, लेकिन गुणवत्ता के मामले में 73वें और लोगों की भोजन पर खर्च करने की क्षमता के मामले में विश्व में 70वें नंबर पर है।
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इन तथ्यों से भारत की खाद्य सुरक्षा संबंधी चुनौतियां स्पष्ट हो जाती हैं। इस सूचकांक में बेहतर स्थान होने का सीधा मतलब यह है कि लोगों को अच्छे पोषण वाले पर्याप्त भोजन के लिए कम खर्च करना पड़ रहा है। डूपोंट के दक्षिण एशिया के अध्यक्ष राजीव वैद्य का कहना है कि यह सूचकांक खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों को समझने में मदद करेगा। खाद्यान्न उत्पादन में बढ़ोतरी के अलावा पोषण की गुणवत्ता को सुधारने के लिए डूपोंट वर्ष 2020 तक 10 अरब डॉलर का निवेश करेगी।
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4.4 करोड़ लोगों को गरीब बना गई मंदी
इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंट यूनिट की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व में पिछले एक दशक के दौरान भोजन के दाम मुद्रास्फीति के मुकाबले दोगुनी रफ्तार से बढ़े हैं। वर्ष 2008 में आई मंदी दुनिया में 4.4 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा के नीचे ले गई है। मंदी की मार से अमेरिका तक नहीं बच पाया जहां 15 फीसदी परिवारों पर खाद्य असुरक्षा की मार पड़ रही है।


उत्पादन भरपूर, फिर भी पेट खाली
विश्व खाद्य सुरक्षा सूचकांक से स्पष्ट होता है कि भारत सहित विश्व के अधिकांश देशों में पर्याप्त उत्पादन के बावजूद बड़ी आबादी को भरपेट भोजन नहीं मिल पा रहा है। यानी असल समस्या वितरण और बाजार की नीतियों में है। भोजन उपलब्धता के पैमाने पर भारत को 100 में से 51.3 अंक मिले हैं, जबकि लोगों की भोजन खरीदने की क्षमता के मामले में सिर्फ 38.4 अंक।
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