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'...तो दुनिया की बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा भारत'

Fri, 19 Apr 2013 08:53 PM IST
न्यूयार्क/एजेंसी
न्यूयार्क/एजेंसी Updated Fri, 19 Apr 2013 08:53 PM IST
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india is not imposing restrictions on investments says chidambaram

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि भारत में निवेश के रास्ते तेजी से खुल रहे हैं और इसमें किसी तरह की बाधा आने का सवाल नहीं है।

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निवेश आकर्षित करने के अभियान के तहत अमेरिका पहुंचे चिदंबरम ने यहां एक टेलीविजन कार्यक्रम में कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के दरवाजे तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए खुल रहे हैं।
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पिछले 22 वर्षों में 90 फीसदी भारतीय अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए खोल दिया गया है। हालांकि कुछ क्षेत्र ऐसे हैं, जहां अभी भी विदेशी निवेश पर रोक लगी हुई है लेकिन इसे भी जल्दी ही खोल दिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि देश में इस्पात, ऊर्जा, सड़क, हवाईअड्डे, बंदरगाह सभी क्षेत्र में विदेशी निवेश के लिए रास्ते खोल दिए गए हैं। इन क्षेत्रों में निवेश की प्रचुर संभावनाएं मौजूद है।

कई क्षेत्रों में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के लिए रास्ते खोल दिए गए हैं। देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार अगर अगले सात-आठ वर्षों तक 8 फीसदी बनी रही, तो भारत दुनिया की एक बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।

भारत में प्रशासनिक व्यवस्था की खामियों पर उठाए गए सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि इसे लेकर कई तरह के पूर्वाग्रह हैं। देश के कई ऐसे राज्य हैं, जहां शासन व्यवस्था पूरी तरह चुस्त दुरुस्त है। कहीं कुछ कमियां भी है लेकिन इन्हें भी दूर करने के प्रयास हो रहे हैं। दुनिया का कोई भी देश सौ फीसदी बेहतर प्रशासन का दावा नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि परियोजनाओं की लागत बढ़ाए बिना इन्हें समय पर पूरा करने का हुनर जापान और चीन जैसे देशों से सीखने की जरूरत है। अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सराहना करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि वह इस बात को नहीं मानते की अमेरिका की आर्थिक हालत बिगड़ रही है।


अमेरिका में अभी भी दुनियाभर से प्रतिभाएं आकर्षित करने का दमखम है। लेकिन, यह भी सच है कि अमेरिका में काम कर रहे प्रतिभावान लोगों में प्रवासी भारतीयों की बड़ी संख्या है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के मंदी से उबरने की रफ्तार अभी भी एक समान नहीं है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं के मंदी से उबरने की रफ्तार विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से ज्यादा धीमी है। ब्रिक्स देश इसका उदाहरण है।

चिदंबरम वाशिंगटन में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष और विश्व बैंक की वार्षिक ग्रीष्मकालीन बैठक में हिस्सा लेने वाले हैं।

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