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'डरने की जरूरत नहीं, मजबूत है इंडियन इकोनॉमी'
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 05 Feb 2014 02:06 PM IST
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अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा राहत पैकेज में की जा रही कटौती का सामना करने के लिए भारत अब कहीं ज्यादा तैयार है।
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भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन के अनुसार आज हम छह महीने पहले की स्थिति की तुलना में कहीं बेहतर तरीके से तैयार हैं। हालांकि हमें ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है।
सरकार और आरबीआई ने पिछले दिनों में कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिसकी वजह से आज भारतीय अर्थव्यवस्था फेड की चुनौती से निपटने के लिए पहले से ज्यादा मजबूत है।
आरबीआई गवर्नर ने फाइनेंशियल स्टेबिलटी डेवलपमेंट काउंसिल (एफएसडीसी) की बैठक के बाद यह बात कही। देश के आर्थिक हालात और उसकी चुनौतियों पर मंगलवार को वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की अध्यक्षता में काउंसिल की बैठक बुलाई गई थी।
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इसमें आरबीआई गवर्नर के अलावा इरडा प्रमुख टीएस विजयन, सेबी चेयरमैन यूके सिन्हा सहित वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे वित्त मंत्री ने अमेरिकी फेड रिजर्व की चुनौती की समीक्षा करने के अलावा अंतर नियामक स्तर पर होने वाले मुद्दों को एक तय समय में हल करने की जरूरत की भी बात कही है।
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वित्त मंत्री ने सभी नियामकों से कहा है कि वित्तीय परिसंपत्तियों के लिए एक कॉमन डीमैट अकाउंट की दिशा में तेजी से काम करना चाहिए। इस कदम के जरिए निवेशकों को काफी फायदा पहुंचेगा।
काउंसिल की बैठक में इसके अलावा फाइनेंशियल सेक्टर लेजिसलेटिव रिफार्म कमीशन (एफएसएलआरसी) की सिफारिशों को लागू करने की दिशा में कदम उठाने की भी चर्चा की गई है।
बैठक में इसके अलावा इस बात का भी आंकलन किया गया कि अमेरिकी फेड रिजर्व के राहत पैकेज में कटौती करने से तरलता की स्थिति पर क्या असर होगा। इसके साथ ही कीमतों में बदलाव आदि के संभावित जोखिम पर भी चर्चा की गई है।
मंगलवार को हुई बैठक इस बात में भी महत्वपूर्ण है कि पिछले हफ्ते अमेरिकी फेड रिजर्व ने तय किया है कि वह हर महीने 75 अरब डॉलर की जगह अब 65 हजार डॉलर के ही बांड खरीदेगा।
इसका असर भारत से विदेशी निवेशकों द्वारा पूंजी निकालने के रूप में हो सकता है।