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देशवासियों को पसंद बन रहे हैं पीडीएस उत्पाद

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 28 Jan 2013 11:29 PM IST
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increasing consumption of pds products
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देश की बढ़ती आबादी के साथ खाद्य उत्पादों की खपत भी तेजी से बढ़ रही है। इस खपत में सरकार के जरिए आम जन को सस्ती कीमत पर उपलब्ध कराए जाने वाले अनाजों की खरीददारी में भी इजाफा हुआ है। सांख्यिकी मंत्रालय की ओर से जारी नेशनल सैंपल सर्वे के 66वें दौर के ब्यौरे के मुताबिक वर्ष 2004-05 और 2009-10 के बीच देश में चावल, गेहूं और चीनी की कुल खपत में पीडीएस खरीद की भागीदारी बढ़ी है।
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सरकार केरोसिन की खपत कम करने को भले ही एलपीजी की उपलब्धता बढ़ा रही है। मगर ग्रामीण और शहरी आबादी में पीडीएस के जरिए मिलने वाले इस ईंधन की खपत भी बढ़ती जा रही है।
ताजा सर्वे के मुताबिक वर्ष 2009-10 में ग्रामीण इलाकों में चावल की कुल खपत में पीडीएस खरीद की भागीदारी 23.5 फीसदी और शहरी आबादी में 18 फीसदी आंकी गई है। जबकि वर्ष 2004-05 में यह क्रमश: 13 और 11 फीसदी थी।
इसी तरह गांवों में गेहूं या आटे की खपत में पीडीएस खरीद की हिस्सेदारी वर्ष 2004-05 में 7.3 फीसदी थी, जो कि 2009-10 में बढ़कर 14.6 फीसदी हो गई है। जबकि शहरी क्षेत्र में इस दौरान पीडीएस खरीद का प्रतिशत 3.8 फीसदी से बढ़कर 9 फीसदी हो गया है। इसी तरह गांव में पीडीएस चीनी की हिस्सेदारी 9.6 फीसदी से बढ़कर वर्ष 2009-10 में 14.7 फीसदी और शहरों में 6.6 फीसदी से बढ़कर 10.3 फीसदी हो चुकी है।

इस दौरान गांवों में केरोसिन की पीडीएस खरीद का भाग 86.3 फीसदी और शहरों में 63.6 फीसदी उल्लेखित किया गया है। यह आंकड़ा वर्ष 2004-05 के मुकाबले गांवों में 9 फीसदी और शहरों में 7 फीसदी अधिक है। देश के एक लाख 794 परिवारों के बीच कराए गए सर्वे के आधार पर इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है।
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