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माल भाड़ा बढ़ने से महंगा होगा रोटी, कपड़ा और मकान

Wed, 27 Feb 2013 08:30 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क Updated Wed, 27 Feb 2013 08:30 AM IST
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increased freight shall make food, housing and computer costly

रेल मंत्री पवन कुमार बंसल द्वारा पेश बजट से मुसाफिरों की जेब पर बेशक सीधा असर न पड़ा हो लेकिन कारोबारी रेल मंत्री से नाखुश हैं। खासतौर से अनाज, तेल, लोहा, सीमेंट और कंप्यूटर आदि सामानों के व्यवसायी, इनका मानना है कि इन वस्तुओं की कीमत में दस फीसदी तक उछाल आ सकता है। हालांकि ढुलाई के लिए सड़क परिवहन पर ज्यादा निर्भरता होने से थोड़ी राहत कपड़े और सब्जियों पर रहेगी।

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रेल बजट में इस बार डीजल की बढ़ती कीमतों के देखते हुए ईंधन का सरचार्ज लगाने की घोषणा रेल मंत्री ने की है। रेल माल भाड़े में बढ़ोतरी का सीधा असर उन वस्तुओं पर पड़ेगा जो थोक में दूसरे राज्यों और मुंबई व गुजरात के बंदरगाहों से आती हैं। साथ ही यहां से दूसरे राज्यों में भी भेजी जाती है।
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मसलन सीमेंट, लोहा, तेल, अनाज, कंप्यूटर और लघु उद्यमों में तैयार होने के सामान। कारोबारियों का कहना है कि अगर रेलवे माल भाड़े में पांच फीसदी का इजाफा करती है तो इन वस्तुओं की कीमत 5-10 फीसदी तक बढ़ेगी।
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दिल्ली लोहा संघ के अध्यक्ष सतीश गर्ग के मुताबिक, राजधानी में करीब 90 फीसदी सीमेंट-लोहा रेल परिवहन से आता है। वहीं दिल्ली ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि 60 फीसदी से ज्यादा अनाज वाया रेलवे दिल्ली पहुंचता है।

ऑल दिल्ली कंप्यूटर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र अग्रवाल ने बताया, ‘करीब 60 फीसदी माल रेल परिवहन से आता है। अब एक तो बंदरगाहों से यहां लाने और इसके बाद करीब बीस राज्यों में भेजने का अतिरिक्त किराया देना होगा। इससे कंप्यूटर कारोबार पर दोहरी मार पड़ेगी।

इससे हमें न्यूनतम दस फीसदी कीमत बढ़ानी पड़ेगी।’ भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष हेमंत गुप्ता का कहना है कि हम करीब 70 फीसदी तेल और संबंधित उत्पाद रेलवे से मंगाते हैं। माल भाड़ा बढ़ने कीमत बढ़ानी पड़ेगी।


गारमेंट और सब्जी मंडी के कारोबारी हालांकि रेल भाड़ा बढ़ने से ज्यादा परेशान नहीं, लेकिन उनका कहना है कि अब विकल्प सीमित होंगे। गांधी नगर मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष केके बल्ली का कहना है कि साल में दो बार रेल किराया बढ़ाने से जल्द ही सड़क और रेल का किराया बराबर हो जाएगा। इसकी मार उन लोगों पर पड़ेगी जो किराया कम होने से रेलवे के जरिए सामान भेजते थे।

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