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मोटी सैलरी वालों के लिए जरूरी है ये खबर
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Mon, 03 Jun 2013 08:50 PM IST
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कर कटौती की अधिक से अधिक संभावनाएं तलाशने में जुटे आयकर विभाग की नजर अब सरकारी और निजी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के सैलरी स्ट्रक्चर पर है।
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इसके अलावा, आयकर विभाग की योजना अतिथि अध्यापकों को भुगतान करने वाले विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों और इवेंट मैनेजर व मेडिकल ट्रांसक्रिप्सन कंपनियों को भी सख्त टीडीएस नियमन के दायरे में लाने की है।
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आयकर विभाग ने बड़े अधिकारियों को किये जाने वाले भत्तों और रिइम्बर्समेंट्स के भुगतान में टैक्स कटौती की छुपी संभावनाओं की जांच के लिए सरकारी और निजी कंपनियों के शीर्ष कार्यकारियों की सैलरी स्लिप स्कैन करने का निर्णय किया है।
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हाल ही में आयकर विभाग और सीबीडीटी के शीर्ष अधिकारियों के बीच हुए विचार विमर्श के दौरान विभाग ने वेतनभोगी कर्मचारियों की सैलरी से हासिल होने वाले टीडीएस (टैक्स डिडक्शन एड सोर्स) का आधार मजबूत कर अधिक से अधिक राजस्व जुटाने के लिए यह फैसला किया है।
पिछले साल कुल कर संग्रह में से टीडीएस श्रेणी के अंतर्गत 41 फीसदी का राजस्व सरकार को हासिल हुआ था। आयकर विभाग इस आंकड़े से अत्यधिक उत्साहित है और इसी के चलते टीडीएस के जरिए कर संग्रह का आधार और मजबूत करने की संभावनाएं तलाश रहा है।
वित्त वर्ष 2012-13 के दौरान टीडीएस श्रेणी के तहत 2,30,188 करोड़ रुपये का कर संग्रह हुआ था, जबकि कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह 5,58,970 करोड़ रुपये था।
विभाग ने अपने टीडीएस संग्रह कार्यालयों को सरकारी और निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के पूरे सैलरी स्ट्रक्चर पर नजर रखने को कहा है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने भी अपने टीडीएस आयुक्तों से बड़ी कंपनियों में बतौर ‘कंसलटेंट’ की तरह जुड़े कुछ निश्चित कर्मचारियों के वर्गीकरण की जांच करने और उन्हें भुगतान किए जाने वाले भत्तों व रिइम्बर्समेंट्स में टीडीएस कटौती की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए हैं।
एक वरिष्ठ आयकर अधिकारी ने बताया कि विभाग की योजना अतिथि अध्यापकों को भुगतान करने वाले विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से भी टीडीएस हासिल करने के लिए प्रभावकारी तरीके से कार्य शुरू करने की है।
इवेंट मैनेजर और मेडिकल ट्रांसक्रिप्सन कंपनियों को भी सख्त टीडीएस नियमन के दायरे में लाया जाएगा।