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निर्यात में बढ़ेगी कृषि क्षेत्र की भूमिका

Wed, 02 Jan 2013 11:43 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 02 Jan 2013 11:43 PM IST
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in exports role of agriculture will grow

वित्त मंत्री पी. चिदंबरम का कहना है कि समावेशी विकास के लिए कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र बहुत मायने रखते हैं। घरेलू मांग की पूर्ति करने के अलावा निर्यात के लिहाज से भी कृषि उत्पादन को बढ़ाने की आवश्यकता है। 2012-13 के बजट से पहले कृषि से जुड़े विभिन्न पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श के दौरान वित्त मंत्री ने कृषि क्षेत्र से जुड़ी मांगों पर ध्यान दिए जाने का भरोसा जताया।

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बुधवार को हुई बैठक के दौरान किसान संगठनों की ओर से भी चावल, गेहूं, चीनी और कपास के निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। बैठक में शामिल हुए भारतीय किसान संघों के परिसंघ (सीआईएफए) के महासचिव चेंगल रेड्डी ने बताया कि आगामी बजट में कृषि क्षेत्र से जुड़ी कई मांगें वित्त मंत्री के सामने रखी गईं।
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इसमें किसानों के लिए पेंशन, मनरेगा को कृषि कार्यों से जोड़ने, कृषि क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ाने के साथ-साथ चावल, कपास, चीनी और गेहूं के निर्यात को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। वित्त मंत्री ने कृषि क्षेत्र के विकास के लिए सभी जरूर कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
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वित्त मंत्री ने 2012-13 के दौरान कृषि उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद जाहिर की है। बैठक में जलवायु परिवर्तन की मार से खेती को बचाने के लिए राष्ट्रीय कृषि जलवायु परिवर्तन फंड बनाने और किसानों को उन्नत बीज उपलब्ध कराने का सुझाव भी दिया गया है। कृषि क्षेत्र के साथ शुरू हुए बजट पूर्व बैठकों के क्रम में वित्त मंत्री की अगली बैठक गुरुवार को ट्रेड यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ होगी।

बैठक में वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा वित्त मंत्री के सलाहकार पार्थसारथी सोम और मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. रघुराम राजन भी मौजूद थे। कृषि क्षेत्र का प्रतिनिधित्व सीआईएफए के चेंगल रेड्डी, सीएसीपी के अध्यक्ष डॉ. अशोक गुलाटी, आईएआरआई, आईआईएम और कृषि विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, बीज कंपनियों के प्रतिनिधियों ने किया।

नहीं हुई प्रमुख किसान संगठनों की भागीदारी
कृषि क्षेत्र के बजट को लेकर हुई इस अहम बैठक में प्रमुख किसान संगठनों खासकर उत्तर भारत में असर रखने वाले भारतीय किसान यूनियन, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन और किसान राजनीति करने वाले दलों का प्रतिनिधित्व नहीं रहा। देश के प्रमुख किसान संगठन नीतिगत मामलों पर रायशुमारी में उन्हें शामिल न करने का मुद्दा उठाते रहे हैं।


इस साल भी स्थिति नहीं बदली और किसान संगठनों की ओर से चुनिंदा लोग ही बुलाए गए। इस बारे में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के संयोजक सरदार वीएम सिंह का कहना है कि सरकार खेती का भविष्य तय करने वाले मुद्दों पर किसानों से संवाद करने से कतराती है। बजट पूर्व इस बैठक में उन्हें वित्त मंत्रालय की कोई से कोई निमंत्रण नहीं मिला।

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