जानिए किसानों को क्या मिला इस बजट में?
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अपने पहले बजट में वित्त मंत्री ने किसान वर्ग के लिए कुछ लोकलुभावन वायदे किए हैं।
हालांकि जेटली की घोषणाएं भारत के इस सबसे बड़े वर्ग के लिए ऊंट के मुंह में जीरे के समान है लेकिन फिर भी यह संकेत दिए गए हैं कि सरकार उस वर्ग को सुविधा देने के पक्ष में है।
कंपटीशन एक्सपर्ट राजय अग्रवाल के अनुसार बजट में किसानों के लिए नीयत दिखी है पर पैसा नदारद है। किसानों के लिए टीवी चैनल बनाने की घोषणा की गई है। इस मद में 100 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
कम पैसा लेकिन नीयत दिखाई
दूसरी तरफ 15 मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च सेंटर स्थापित किए जाने की योजना है।
हालांकि इनके लिए ज्यादा रकम नहीं दी गई है लेकिन इस तरह की योजनाएं से मोदी सरकार ने संकेत देने की कोशिश की है कि वो किसानों के लिए काम करेंगे।
कृषि क्षेत्र में मुनाफा बढ़ाने के लिए पीपीपी मॉडल के जरिए निवेश किया जाएगा। 100 करोड़ रुपए का एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड बनेगा। विशेषज्ञ बता रहे हैं कि यह कदम यह दूरगामी परिणाम दे सकता है।
कृषि के लिए आठ लाख करोड़ रुपए का फंड
ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और कृषि से जुड़ी परियोजनाओं के कर्ज के लिए आठ लाख करोड़ रुपए का फंड निर्धारित किया गया है।
अब छोटे और मझोले किसान अपनी किसानी और नई परियोजनाओं के लिए सस्ते और सरलीकृत तरीके से सरकारी कर्ज ले सकेंगे।
दूसरी और खास बात ये है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भंडारगृह के विकास के लिए 5 हजार करोड़ रूपए आवंटित किया गया।
कृषि कार्य आएंगे मनरेगा में
किसानों के लिए इसे अच्छा संकेत कहा जा सकता है। यानी कि भूमिहीन किसानों को भी मनरेगा के तहत रोजगार मिल सकेगा। देखा जाए तो यह मनरेगा का विस्तार है लेकिन ये विस्तार गरीब किसान के लिए फायदेमंद होगा।
कृषि मंत्रालय की सिफारिश पर कपास की लोडिंग-अनलोडिंग पर लगने वाला सेवा कर समाप्त किया गया।
इसके अलावा पूर्वोत्तर राज्यों में ऑर्गेनिक फॉर्मिंग के विकास के लिए 100 करोड़ रुपए का आबंटन किया गया है जो उत्साहवर्धक लगता है।
हथकरघा बनाम पश्मीना
हथकरघा उद्योग बढ़ावा देने के लिए ट्रेड फेसिलिटेशन सेंटर बनाने की बात की गई है।
देश में नई हस्तकला एकेडमी खुलेगी।
देखा जाए तो ये एक बड़ा उद्योग है लेकिन विडंबना देखिए कि कश्मीर में पश्मीना उद्योग (50 करोड़ रुपए का आवंटन) के मुकाबले इस उद्योग की बेहतरी के लिए सरकार ने केवल 30 करोड़ रुपए दिए हैं।