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टेलीकॉम कंपनियों द्वारा ग्राहकों को दिए जाने वाले बिल की निगरानी अब ऑडिटर करेंगे। इसके लिए टेलीकॉम नियामक ट्राई ने 17 ऑडिटरों का एक पैनल बनाया है।
टेलीकॉम कंपनियों को पैनल में से ऑडिटरों को नियुक्त करना होगा। ऑडिटरों को कंपनियों के बिलिंग और मीटरिंग प्रणाली को जांचने का अधिकार होगा। ट्राई के इस कदम से ग्राहकों को ज्यादा बिल मिलने की शिकायतों से राहत मिल सकेगी।
ट्राई करेगा ऑडिटरों की नियुक्ति
शुक्रवार को इस संबंध में ट्राई ने कंपनियों के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं। ट्राई के निर्देश के अनुसार कंपनियों को 30 अप्रैल 2014 तक पैनल में से ऑडिटरों की नियुक्ति करनी होगी, जो कि साल 2014-15 में कंपनियों के बिलिंग और मीटरिंग प्रणाली का ऑडिट करेंगे।
कंपनियों द्वारा नियुक्त ऑडिटर का कार्यकाल दो वर्ष से अधिक नहीं होगा। ट्राई के अनुसार 17 ऑडिटरों का यह पैनल 2017 तक के लिए मान्य होगा। ट्राई के इस निर्देश के तहत मोबाइल सेवाएं, बेसिक फोन सेवाएं और इंटरनेट सेवाएं देने वाली कंपनियां आएंगी।
कंपनियों पर लगेगा जुर्माना
ट्राई ने यह निर्देश क्वालिटी ऑफ सर्विसेज रेगुलेशन 2013 के तहत कंपनियों को दिया है। इसके तहत ट्राई को यह भी अधिकार होगा कि वह टेलीकॉम कंपनियों द्वारा ऑडिट रिपोर्ट तय समय पर न जमा करने पर उन पर प्रति हफ्ते एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगा सके।