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देश की नई सरकार के सामने मुख्य चुनौती महंगाई पर काबू पाने के साथ-साथ आम लोगों के निवेश को प्रोत्साहित करना व उनकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करना होगी।
पिछले कुछ सालों से अनियंत्रित महंगाई ने जहां लोगों के निवेश पर प्रतिकूल असर डाला है, वहीं उनकी आर्थिक सुरक्षा भी कमजोर हुई है। आमतौर पर बढ़ती महंगाई के साथ बीमा कवर की जरूरत को अपडेट करने जैसे विषय पर लोग गंभीरता से नहीं सोचते हैं।
इस बारे में थोड़ी सी भी लापरवाही भविष्य में व्यक्ति और उसके परिवार के सामने गंभीर अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न कर सकती है। इसलिए यह जरूरी है कि महंगाई की बदलती चाल के साथ निवेशक को अपने बीमे के पोर्टफोलियो को भी बदलते रहना चाहिए।
बीमा पर महंगाई के असर का करें सटीक आकलन
महंगाई दर का आपके बीमा कवर पर क्या असर हो रहा है या होगा, इसका सटीक आकलन होना चाहिए। सामान्य नियम के अनुसार आपको अपनी सालाना आमदनी से निवेश योग्य संपत्ति और देयताओं को घटाकर बाकी राशि का करीब 12 गुना जीवन सुरक्षा लेने पर विचार करना चाहिए।
लेकिन, इसके साथ-साथ आमदनी में बढ़ोतरी और बढ़ती महंगाई दर जैसे अहम बातों पर भी विचार करना चाहिए। आपकी बढ़ती आमदनी का स्वाभाविक असर आपके जीवन स्तर पड़ेगा और बढ़ती महंगाई किसी व्यक्ति की उपभोग क्षमता पर कई तरह के प्रभाव डालती है।
जिंदगी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है आपके परिवार की जरूरतें और मांग भी बढ़ती जाती हैं। हर व्यक्ति अपने न रहने पर भी परिवार के लिए समान जीवनशैली जारी रखना चाहता है। इसलिए, यह जरूरी है कि महंगाई दर में वृद्धि के साथ जीवन सुरक्षा की बढ़ती आवश्यकता का सटीक आकलन किया जाए।
बीमे के संदर्भ में महंगाई दर पर विचार जरूरी
बीमा खरीदते समय अधिकतर व्यक्ति रुपये के भावी मूल्य को नजरअंदाज कर देते हैं। महंगाई दर का तात्पर्य क्रयशक्ति के मानक स्तर की तुलना में कीमतों में आम बढ़ोतरी से है।
स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा का खर्च भी तेजी से बढ़ा है, जिसकी रफ्तार कभी-कभी अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों की वृद्धि दर से भी ज्यादा थी।
इस तरह, अपने परिवार की भविष्य की जरूरतों की योजना बनाने के लिए बेहतर है कि सामान्य जीवन-यापन के खर्चों से अलग शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के लिए महंगाई दर की गणना की जाए।
टर्म जीवन बीमा पॉलिसी पर महंगाई का असर
आमतौर पर टर्म प्लान के लिए 15, 20 या 30 वर्षों की लंबी अवधि तक भुगतान किया जाता है। आप जिस दर पर भुगतान करते हैं वह सामान्यतया इस पूरी अवधि के लिए निर्धारित होती है।
इसलिए, चूंकि महंगाई दर आमतौर पर 7 से 9 फीसदी की रेंज में है, इसी अनुपात में हर साल रुपये का मूल्य गिरता जाता है। इसके मायने हुए कि रुपये की खरीद क्षमता कम हो जाती है और वह पिछले वर्ष के जितना सुरक्षा लाभ देने की स्थिति में नहीं होता है।
जीवन बीमा के लिए आज आप हर महीने जो प्रीमियम दे रहे हैं वह रुपये के संदर्भ में समान नहीं रहेगा और महंगाई दर के चलते 10 वर्षों बाद रुपया का मूल्य कम हो जाएगा। जैसे मान लीजिए, वर्ष 2011 में 10 लाख रुपये में जो कुछ खरीदा जा सकता था, उसके लिए वर्ष 2031 में 8 फीसदी महंगाई दर पर करीब 45 लाख रुपये की आवश्यकता होगी।
टर्म पॉलिसी बढ़ाकर घटा सकते हैं महंगाई का असर
टर्म बीमा पॉलिसी बढ़ाकर ‘बीमित राशि’ (मृत्यु पर मिलने वाली राशि) में महंगाई दर के अनुरूप हर साल 5-10 फीसदी की दर से बढ़ोतरी की जा सकती है।
इस तरह, बीमित राशि में बढ़ोतरी के विकल्प के साथ यह बढ़ते जीवन शैली के खर्च से बचाव करता है। इससे किफायती लागत पर पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा मिलती है।
अधिकतर कंपनियां मामूली अतिरिक्त लागत पर उचित राइडर ऑप्शन (अतिरिक्त लाभ की सुविधा) के साथ बीमा उपलब्ध कराती हैं। इसके अलावा, धूम्रपान नहीं करने वाले व्यक्ति को अतिरिक्त लाभ देती हैं। महिलाओं के लिए कुछ पॉलिसियों में विशेष छूट भी मिलती है।
किसके लिए लाभकारी हैं टर्म बीमा प्लान
अगर आपकी चिंता महंगाई दर में बढ़ोतरी को लेकर है और आप युवा हैं। यानी, परिवार बसाने के तुरंत बाद पॉलिसी ले रहे हैं तो यह आपके लिए उपयुक्त विकल्प हो सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना चाहिए कि बढ़ती बीमित राशि के अनुरूप आपके बीमा प्रीमियम की लागत भी बढ़ सकती है।
इसलिए आपको यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आप इस वृद्धि की भरपाई कर सकेंगे। पॉलिसी के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए बीमा सलाहकार की भी राय लेना उचित है।
महंगाई दर की चाल का ख्याल रखने वाली नई पॉलिसी आज के दौर में जरूरी है, लेकिन यह भी जरूरी है कि किसी ऐसी बीमा कंपनी का चुनाव किया जाए, जिनकी क्लेम सेटलमेंट सेवाएं अच्छी हों। किसी बीमा कंपनी के प्रदर्शन का पैमाना उसके क्लेम सेटलमेंट के प्रदर्शन से ही तय होती है। इसलिए बीमा पॉलिसी पर अंतिम निर्णय के पहले इस पर सावधानीपूर्वक विचार कर लेना चहिए।