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सोने में करते हैं निवेश तो जो जरूर पढ़े खबर, कहीं पैसा डूब न जाए?
Updated Mon, 10 Feb 2014 01:32 PM IST
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बाजार नियामक सेबी ने धोखाधड़ी से पैसे जमा कराने वाली योजनाओं पर शिकंजा कसना जारी रखा है। सेबी ने सोने से जुड़ी बांड योजनाओं में निवेशकों को आकर्षक रिटर्न का प्रलोभन देकर निवेश कराने वाली योजनाओं को अपने रडार पर लिया है।
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बाजार नियामक सेबी ने ऐसी कई गोल्ड डिपाजिट योजनाओं की पड़ताल की है। हालांकि, ऐसी अधिकांश योजनाओं में नियमन को लेकर स्पष्टता की कमी के चलते सेबी के लिए इन योजनाओं के संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करने में मुश्किलें आ रही हैं।
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इसके लिए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने रिजर्व बैंक सहित अन्य नियामकों और सरकारी विभागों से मदद मांगी है।
किन गोल्ड स्कीमों में है खतरा?
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेबी अधिकांश गोल्ड लिंक्ड मनी पूलिंग स्कीमों के मामलों को रिजर्व बैंक को सौंपना पड़ सकता है। बैंकों और रजिस्टर्ड एनबीएफसी द्वारा गोल्ड डिपाजिट योजनाओं का नियमन रिजर्व बैंक के दायरे में ही है।
हालांकि, समस्या इससे कहीं अधिक बड़ी है, वह है गोल्ड बांड स्कीम। इन योजनाओं को न तो बैंक और न ही एनबीएफसी संचालित कर रहे हैं और जो संस्थाएं यह योजनाएं चला रही हैं, वे रिजर्व बैंक के पास पंजीकृत नहीं है।
जैसेकि, कई ज्वेलर्स और अन्य बुलियन कारोबार से जुड़ी इकाइयां ग्राहकों से सोने में किस्तों में निवेश की योजनाएं चला रही हैं और एक निश्चित समय के बाद सोने की डिलवरी या प्रभावी रिटर्न लेने की पेशकश कर रही हैं।
हालांकि, समस्या इससे कहीं अधिक बड़ी है, वह है गोल्ड बांड स्कीम। इन योजनाओं को न तो बैंक और न ही एनबीएफसी संचालित कर रहे हैं और जो संस्थाएं यह योजनाएं चला रही हैं, वे रिजर्व बैंक के पास पंजीकृत नहीं है।
जैसेकि, कई ज्वेलर्स और अन्य बुलियन कारोबार से जुड़ी इकाइयां ग्राहकों से सोने में किस्तों में निवेश की योजनाएं चला रही हैं और एक निश्चित समय के बाद सोने की डिलवरी या प्रभावी रिटर्न लेने की पेशकश कर रही हैं।