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रुपये की बिगड़ी चाल से बंद होंगी सैकड़ों कंबल फैक्टरियां
पानीपत/हरेंद्र रापरिया
Updated Tue, 23 Jul 2013 12:05 AM IST
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हरियाणा के पानीपत जिले में कंबल बनाने वाली फैक्टरियों में पिछले सीजन के करीब 30 लाख कंबल बचे पड़े हैं। डॉलर में तेजी के बाद रुपये की बिगड़ी चाल से शौडी और एक्रेलिक कंबल उद्योग पर संकट गहरा गया है।
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डॉलर करीब आठ हफ्ते से 60 रुपये के आसपास घूम रहा है। ऐसे में आयातित रग्स की कीमत बढ़ गई है। इसका सीधा असर शौडी और एक्रेलिक यार्न से बनने वाले कंबल उद्योग पर पड़ रहा है।
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कंबल एसोसिएशन के मुताबिक इन हालात में इस बार 100 से अधिक फैक्टरियों में उत्पादन नहीं हो पाएगा और 15 हजार से अधिक कारीगरों को काम से वंचित रहना पड़ सकता है।
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पानीपत से करीब 4,500 करोड़ रुपये के टेक्सटाइल उत्पाद का निर्यात होता है। इसके अलावा यहां से घरेलू बाजार में करीब 25 हजार करोड़ रुपये के टेक्सटाइल उत्पाद बिक्री के लिए जा रहे हैं।
इनमें से कंबल का घरेलू बाजार 1,300 करोड़ रुपये का है। करीब 850 करोड़ के कंबल की ट्रेडिंग होती है। बाकी यहां की मिलों में तैयार होता है।
कंबल में रग्स से तैयार होने वाले शौडी और एक्रेलिक यार्न का इस्तेमाल होता है। यह धागा विदेशों से आयात होने वाले रग्स से मिलता है, मगर अब डॉलर का रेट 60 रुपये के आसपास होने से उद्यमी रग्स के नए ऑर्डर नहीं दे रहे हैं।
गोदामों में भरा पड़ा है पुराना माल
पानीपत कंबल मैन्युफैक्चर एसोसिएशन के अनुसार पिछले सीजन में यूपी सरकार की गरीबों को कंबल वितरित करने की योजना पर एडवांस में काम करते हुए कंबल निर्माताओं ने धड़ाधड़ कंबल तैयार कर दिए।
बाद में सरकार की यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। ऐसे में पानीपत में पिछले सीजन में शौडी यार्न से बने 25 लाख से अधिक कंबल बचे हैं। ऐसे में इस बार सौ से फैक्टरियों में उत्पादन होने की गुंजाइश न के बराबर है।
घाटे में बेच रहे हैं रग्स के कंटेनर
सीजन की तैयारियों को देखते फरवरी-मार्च में उद्यमियों ने शौडी और एक्रेलिक के लिए रग्स के ऑर्डर दे दिए थे। अब धीरे-धीरे विदेशों से माल आना शुरू हो गया, लेकिन इसी बीच डॉलर ने उनका खेल बिगाड़ दिया।
ऐसे में कई कंबल निर्माता रग्स को खुद इस्तेमाल करने के बजाय बाजार में 25 टन के कंटेनर को सवा से डेढ़ लाख रुपये घाटे में बेच रहे हैं। कारण महंगा रग्स कंबल में इस्तेमाल करने से उसका लागत मूल्य बढ़ रहा है।
पिछले सीजन के 25-30 लाख कंबल बचे होने के कारण 100 से अधिक फैक्टरियों में उत्पादन न होने के कारण 15 हजार से अधिक कारीगर को काम नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा शौडी और एक्रेलिक यार्न महंगा होने से इसका सीधा असर कंबल उद्योग पर पड़ रहा है। इसके कारण कंबल की लागत 30 फीसदी तक बढ़ चुकी है। अकेले पानीपत में इस सीजन में 40 प्रतिशत फैक्टरियों में उत्पादन बंद पड़ा है।- काकू बंसल, संरक्षक पानीपत कंबल मैन्युफैक्चर एसोसिएशन