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मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की वृद्धि दर 17 माह के टॉप पर

Fri, 01 Aug 2014 09:17 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Fri, 01 Aug 2014 09:17 PM IST
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HSBC manufacturing PMI jumps to 17-month high in July

देश के मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र की वृद्धि दर जुलाई में 17 महीने के टॉप पर पहुंच गई। वित्तीय सेवा कंपनी एचएसबीसी के सर्वे के मुताबिक आम चुनाव के बाद कारोबारी भरोसा मजबूत होने से घरेलू और विदेशी कंपनियों से मिल रहे ताबड़तोड़ ऑर्डरों से मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र में यह जोरदार तेजी आई है।

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एचएसबीसी इंडिया मैन्यूफैक्चरिंग परचेज मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) जुलाई में 53.0 अंक पर रहा, जो जून में 51.5 पर था। यह सूचकांक फैक्ट्री उत्पाद में वृद्धि के पैमाने के रूप में देखा जाता है और इसमें सुधार कारोबारी गतिविधियों में ठोस सुधार का संकेत है। पीएमआई का स्तर 50 से ऊपर रहना वृद्धि और इससे कम रहना गिरावट को दर्शाता है।
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भारत के मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र के कारोबारी स्थितियों में लगातार नौवें महीने सुधार दर्ज किया गया है। जिसकी मुख्य वजह मांग में आए जोरदार उछाल से उत्पादन में बढ़ोतरी करना रही। एचएसबीसी के सह-अध्यक्ष (एशियाई आर्थिक अनुसंधान) फ्रेडरिक न्यूमैन ने कहा कि घरेलू और बाहरी दोनों स्रोतों से ऑर्डर की भरमार से व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ी हैं और इसकी बदौलत मैन्यूफैक्चरिंग पीएमआई 17 महीने के शीर्ष स्तर पर पहुंच गया।
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एचएसबीसी ने इसके साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि कंपनियों पर उत्पादन लागत का दबाव तेजी से बढ़ा है और आपूर्ति की राह में बाधाओं के चलते बिना महंगाई को हवा दिए विकास दर में सुधार की संभावना सीमित रह सकती है। न्यूमैन ने कहा कि रिकवरी की रफ्तार से कीमतों पर दबाव भी बढ़ गया है, क्योंकि संसाधनों की कीमत तेजी से बढ़ी है। इसका मतलब यह कि मौजूदा हालात में रिजर्व बैंक को उतनी खुशी नहीं हो सकती, जितना हम खुश हो रहे हैं।

सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक बारिश में धीरे-धीरे सुधार हुआ है जिससे सूखे का खतरा कम हुआ है। इसके अलावा महंगाई को नियंत्रित रखने में नई सरकार की भूमिका काफी सक्रिय नजर आ रही है। यह दो अहम कारक हैं जिसके चलते अगले सप्ताह मौद्रिक समीक्षा में रिजर्व बैंक ब्याज दरों को अपरिवर्तित रख सकता है। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं कि महंगाई के खिलाफ लड़ाई समाप्त हो गई है।


आर्थिक विकास दर में रिकवरी की रफ्तार पर नजर रखने की जरूरत है यदि इसमें तुरंत तेजी आती है तो यह मुद्रास्फीतिक भी हो सकती है। रिजर्व बैंक आगामी 5 अगस्त को अपनी मौद्रिक समीक्षा पेश करेगा।

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