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बजट में रक्षा क्षेत्र को क्या मिला खास?

Thu, 10 Jul 2014 07:33 PM IST
Updated Thu, 10 Jul 2014 07:33 PM IST
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how much allocation for defence sector in budget 2014?

चुनाव प्रचार के दौरान पाकिस्तान और चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की बात करने वाले नरेंद्र मोदी अपनी सरकार के पहले बजट में फंड की कमी से जूझ रही सेना के लिए ही कंजूसी दिखा गए।

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मोदी की एनडीए सरकार ने आधुनिकीकरण को तरस रही सेना के मद में सिर्फ 5000 करोड़ रुपए जोड़ने का फैसला किया है। इस जोड़ के साथ रक्षा बजट की कुल राशि 2.29 लाख करोड़ हो गई है।
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यूपीए-2 सरकार के इस साल फरवरी में पेश किए गए अंतरिम बजट में रक्षा को 2.24 लाख करोड़ रुपया आवंटित किया गया था। हालांकि सरकार ने रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश (एफडीआई) को 26 फीसदी से बढ़ा कर 49 फीसदी कर दिया है। सरकार को उम्मीद है कि एफडीआई के इस फैसले से रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश बढेगा।

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कहां खर्च हो जाता है इतना पैसा?

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गौरतलब है कि सालाना बजट का करीब 70 फीसदी वेतन और आम रख रखाव पर ही खर्च हो जाता है। लिहाजा आधुनिकारण के लिए रक्षा मंत्रालय के पास फंड की हमेशा कमी रहती है।

रक्षा की नयी योजनाओं की घोषणा करते हुए वित्त और रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में एफडीआई फॉरेन इन्वेस्टमेंड प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) के जरिए होगा और इसका प्रबंधन भारतीय कंपनियों के हाथ में ही होगा।

जेटली ने अपने बजट में सेवानिवृत्त सैनिकों और अधिकारियों के वन रैंक वन पेंशन की योजना को मंजूरी देते हुए इस मद में 1000 करोड़ रुपया खर्च करने की घोषणा की है।

वित्त मंत्री ने रक्षा के आधारभूत संसाधनों और निर्माणों को मजबूत करने के मकसद से 5000 करोड़ के पूंजीगत परिव्यय का अलग से इंतजाम किया है। इसमें से 100 करोड़ रुपया सीमावर्ती क्षेत्रों में रेल व्यवस्था को मजबूत करने में खर्च की जाएगी।

रक्षा क्षेत्र में बढ़ाया गया एफडीआई

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बजट भाषण में जेटली ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़ा रक्षा खरीदार है। अभी भारत रक्षा जरुरतें पूरी करने के लिए विदेशी सरकार और कंपनियों पर निर्भर है। इस खरीदारी में भारत की विदेशी मुद्रा भारी मात्रा में बाहर चली जाती है।

इसी के मद्देनजर रक्षा क्षेत्र में एफडीआई को बढाया गया है। गौरतलब है कि रक्षा मंत्रालय आधुनिक उपकरणों की खरीदारी के लिए पिछले कुछ सालों से 40 से 60 हजार करोड़ रुपए की कमी को पूरा नहीं कर पा रहा है।

आधुनिकीकरण की मुहीम में मंत्रालय अगले कुछ महीनों में विदेशी कंपनियों के साथ बडे़ सौदों को हरी झंडी देने की प्रक्रिया में है। इसमें 126 कई तरीकों से इस्तेमाल की जाने वाले (मल्टी रोल) लड़ाकू जहाज, अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर और हवा में ही तेल भरने वाले जहाज मुख्य हैं।

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