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गुजरात में तीसरा प्लांट लगाएगी होंडा कार्स
नई दिल्ली/महेंद्र सिंह
Updated Mon, 29 Sep 2014 08:58 AM IST
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कार निर्माता कंपनी होंडा कार्स इंडिया लिमिटेड (एचसीआईएल) भारत में अपना तीसरा प्लांट गुजरात में लगाने जा रही है। कंपनी ने नए प्लांट के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके अलावा होंडा अपनी कारों पर वेटिंग कम करने के लिए उत्पादन को रिस्ट्रक्चर कर रही है। नवंबर तक कंपनी अपने टपूकड़ा प्लांट में दो शिफ्ट में उत्पादन शुरू कर देगी। कंपनी को उम्मीद है कि इससे उसे अपनी कारों पर वेटिंग कम करने में मदद मिलेगी। इन मुद्दों पर अमर उजाला के संवाददाता महेंद्र सिंह ने होंडा कार्स इंडिया लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (मार्केटिंग एंड सेल्स) ज्ञानेश्वर सेन से विस्तार से बातचीत की है। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश।
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होंडा सिटी पर लगभग तीन माह की वेटिंग चल रही है। इसकी क्या वजह है और वेटिंग कम करने के लिए क्या कदम उठा रहे है?
होंडा सिटी मिड साइज सिडान सेगमेंट में हमारा अहम ब्रांड है। इस ब्रांड के साथ हमारे ग्राहक भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। होंडा सिटी हमने लगभग एक वर्ष पहले लांच की है। होंडा सिटी के तमाम संस्करण लांच हो चुके हैं। हमारे ग्राहक भी होंडा सिटी के नए-नए संस्करण खरीदते रहते हैं। ऐसे में होंडा सिटी हमारा सबसे विश्वसनीय ब्रांड है। इसके अलावा पिछले माह में ग्रेटर नोएडा स्थित अपने प्लांट में हमने होंडा सिटी का उत्पादन बंद किया था। इसकी वजह ग्रेटर नोएडा से टपूकड़ा में शिफ्टिंग का काम होना था। टपूकड़ा में हम नवंबर से दो शिफ्ट में काम शुरू कर देंगे। अभी वहां एक शिफ्ट में काम चल रहा है। टपूकड़ा की सालाना उत्पादन क्षमता 1,20,000 कार है। ऐसे मे हम उम्मीद कर रहे हैं कि नवंबर के अंत तक वेटिंग कम हो जाएगी। वेटिंग कम करने के लिए हम उत्पादन को रिस्ट्रक्चर भी कर रहे हैं।
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आपके दोनों प्लांट उत्तर भारत में हैं। इसके पीछे कोई खास रणनीति है?
वास्तव में हमारा पहला प्लांट ग्रेटर नोएडा में लगा। इसके बाद हमारा सप्लायर बेस भी उत्तर भारत में तैयार हुआ। ऐसे में जब दूसरा प्लांट लगा तो उत्तर भारत ज्यादा मुफीद लगा। दोनों प्लांट उत्तर भारत में होने से कंपोनेंट एक प्लांट से दूसरे प्लांट में भेजना आसान होता है। उदाहरण के लिए हम बॉडी पैनल बना कर दूसरे प्लांट भेज देते हैं। हालांकि हम एक नया प्लांट गुजरात में लगाने जा रहे हैं। इसके लिए हमने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
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भारत के बाजार के लिए अगले कुछ वर्षों के लिए आपकी क्या रणनीति है?
फिलहाल हम देशभर में अपने डीलरशिप नेटवर्क को मजबूत बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसके तहत हम मौजूदा वित्त वर्ष के अंत तक यानी मार्च 2015 तक अपने डीलरशिप नेटवर्क में 35 फीसदी का विस्तार करेंगे। मार्च 2014 में 107 शहरों में हमारे 170 डीलर थे और विस्तार के तहत मार्च 2015 तक हम इनकी संख्या बढ़ा कर 150 शहरों में 230 डीलर करेंगे। डीलरशिप नेटवर्क के विस्तार के तहत देश के सभी हिस्सों को कवर किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया की अपील की है। ऑटो सेक्टर में भारत में कंपनियों के प्लांट तो हैं लेकिन यहां कंपनियां ज्यादातर असेंबलिंग का काम करती हैं। कंपानेंट बाहर से मंगाती हैं। भारत में कंपोनेंट बने इसके लिए क्या कदम सरकार को उठाने चाहिए?
सबसे पहले तो देश में टैक्स स्ट्रक्चर आसान होना चाहिए। केंद्र सरकार को गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू करना चाहिए। होंडा कार्स ने कार उत्पादन को 90 फीसदी तक लोकलाइज्ड कर दिया है। यानी हम कार बनाने में 90 फीसदी स्थानीय तौर पर बने हुए कंपोनेंट का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा हम कंपोनेंट का निर्यात भी करते हैं। पिछले वर्ष हमने लगभग 600 करोड़ रुपये के कंपोनेंट का निर्यात किया था। ऐसे मेें हमारा मानना है कि भारत को मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाया जा सकता है।
छोटी कार सेगमेंट में किस तरह से फोकस कर रहे हैं?
छोटी कार सेगमेंट में ब्रियो ने पिछले तीन वर्ष में रेपुटेशन बनाई है। यह हमारी स्ट्रैटेजिक कार है। यह हमारी एक मात्र हैचबैक भी है। ब्रियो का डीजल वर्जन नहीं है। ऐसे में इसकी बिक्री का आंकड़ा ज्यादा बड़ा नहीं दिखता है, लेकिन हमारा मानना है कि ब्रियो से हमें अपना कस्टमर बेस बनाने में मदद मिल रही है। यही कस्टमर आगे चल कर हमारी बड़ी गाड़ियां खरीदेंगे। अगले वर्ष हम एक और हैचबैक लाएंगे।