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रेल किराये में बढ़ोतरी से सुधरेंगे आर्थिक हालात
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 24 Jun 2014 03:53 AM IST
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मोदी सरकार द्वारा रेल किराये में बढ़ोतरी को एक साहसिक कदम बताते हुए दाइचे बैंक ने कहा है कि इस फैसले से राजकोषीय संतुलन बेहतर करने, घाटा कम करने और आने वाले दिनों में महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
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दाइचे बैंक ने ‘इक्विटी रिसर्च : एशिया, इंडिया इक्विटी स्ट्रेटजी रिपोर्ट’ में मोदी सरकार के फैसले की सराहना करते हुए कहा है कि सरकार ने यात्री किराये में बढ़ोतरी जैसे राजनीति रूप से मुश्किल निर्णय सहित सभी तरह के रेल किराये में वृद्धि कर आर्थिक असंतुलन को दूर करने की कोशिश की है।
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सरकार ने 25 जून से रेल यात्री किराये में 14.2 फीसदी और माल भाड़े में 6.5 फीसदी की बढ़ोतरी की है। हालांकि, इन फैसलों का तात्कालिक असर महंगाई के रूप दिखाई पड़ सकता है। लेकिन, संरचनात्मक आधार पर महंगाई नियंत्रित होनी चाहिए।
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रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार आर्थिक सुधार को अपने मुख्य राजनीतिक एजेंडे के रूप में पेश कर रही है। सरकार को सब्सिडी को तर्कसंगत बनाने के मसले पर राजनीतिक रूप से कुछ गैर लोकप्रिय आर्थिक फैसले भी लेने होंगे। गैरजरूरी सब्सिडी में कटौती से बाजार की विकृतियां कम होती हैं और इससे अर्थव्यवस्था में भरोसा बढ़ता है। हाल में किए गए उपायों से आने वाले समय में बांड मार्केट को यह भरोसा मिलेगा कि सरकार महंगाई प्रबंधन और वित्तीय समेकन को लेकर गंभीर है।
रिपोर्ट का कहना है कि सरकार के ऐसे कदमों से निवेशकों का भरोसा अर्थव्यवस्था फिर से बहाल होगा। आर्थिक असंतुलन दूर करने और खासकर सब्सिडी को तर्कसंगत बनाकर राजकोषीय संतुलन बेहतर बनाने को लेकर सरकार के दृढ़ विश्वास का सकारात्मक असर निवेशकों पर होगा।
रिपोर्ट का कहना है कि हमें अभी उम्मीद है, कि सरकार बजट में सब्सिडी को लेकर सख्त फैसले करेगी। हमें भरोसा है कि सरकार एलपीजी के साथ-साथ केरोसिन की कीमतों को भी तर्कसंगत बनाने की दिशा में कदम उठा सकती है।
पूर्व रेलमंत्रियों द्वारा यात्री किराये में बढ़ोतरी न करने के निर्णयों के चलते भारतीय रेल गंभीर आर्थिक बदहाली से गुजर रही है। हालांकि, कांग्रेस सरकार ने पिछले साल किराये में कुछ वृद्धि की थी लेकिन पैसे की तंगी झेल रही रेलवे के लिए यह नाकाफी था।
रिपोर्ट के मुताबिक पुराने पड़ चुके संसाधनों को बदलने, परिचालन गतिविधि और सिंग्नलिंग सिस्टम को अपग्रेड करने के लिए पर्याप्त निवेश की जरूरत है। जो कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं। मोदी सरकार से उम्मीद है कि वह भारतीय रेलवे को निजी और सार्वजनिक निवेश के जरिए फिर से मजबूत बनाएगी।