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‘मेक इन इंडिया’ में रक्षा क्षेत्र पर रहेगा फोकस
नई दिल्ली /सुजय मेहदूदिया
Updated Wed, 24 Sep 2014 08:37 PM IST
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विज्ञान भवन में बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अभियान के मेक इन इंडिया के लांच के मौके पर भारतीय कंपनियों और वैश्विक कंपनियों के सीईओ, राजदूत और वरिष्ठ नौकरशाहों के जमावड़े के बीच सरकार का फोकस मैन्यूफैक्चरिंग और हाई इंड टेक्नोलॉजी पर होगा।
वैश्विक कंपनियों की मदद से रक्षा क्षेत्र में मैन्यूफैक्चरिंग गतिविधियों को बढ़ावा देना सरकार के एजेंडे में है। प्रधानमंत्री का पहले दिन से इस बात पर जोर है कि भारत को हाई इंड टेक्नोलॉजी उत्पादों और रक्षा उत्पादों के लिए मैन्यूफैक्चरिंग बेस बनना चाहिए।
इससे न सिर्फ रोजगार पैदा होगा बल्कि कुशल श्रम शक्ति का इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसी तरह से यह सुनिश्चित करने पर भी फोकस होना चाहिए कि कम से कम एक दर्जन घरेलू कंपनियों को मल्टीनेशनल कंपनियों का दर्जा मिले और उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री प्रायरिटी सेक्टर का उल्लेख करेंगे, जिन पर सरकार का ज्यादा फोकस होगा।
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वैश्विक कंपनियों जैसे यूरोपीय एयरक्राफ्ट मैन्यूफैक्चरर एयरबस, जर्मनी की कार निर्माता कंपनी मार्सिडीज-बेंज, दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और जपान की कंपनी होंडा मोटर कंपनी के प्रमुख इस मौके पर नई नीतियों से रूबरू होंगे।
सरकार ने दुनिया भर की 3000 से अधिक मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों की पहचान की है। सरकार अभियान के दौरान इन कंपनियों को भारत में निवेश करने और मैन्यूफैक्चरिंग फैसलिटी लगाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
उम्मीद की जा रही है कि नरेंद्र मोदी ऑडिएंश के तौर पर मौजूद सीईओ को देश में मैन्यूफैक्चरिंग गतिविधियों के लिए वातावरण को बेहतर बनाने उठाए जा रहे या आगामी दिनों में उठाए जाने वाले कदमों के बारे में बताएंगे। इसके तहत सरकार सेक्टर के डिलाइसेंसिंग और नियंत्रमुक्त करने के अलावा निवेशकों की चिंताओं के समाधान के लिए तेजी से रिस्पांस देने वाले तंत्र पर भी फोकस करेगी।
प्रधानमंत्री इस मौके पर डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन (डीआईपीपी) की वेबसाइट पर ‘इनवेस्टर वाल ’ पहल भी शुरू कर सकते हैं।
इससे निवेशकों और विभाग के अधिकारियों के बीच सीधे और रियल टाइम बातचीत हो सकेगी। बाद में प्रधानमंत्री दूसरे मंत्रियों के साथ लंच के बाद चाय पर इंडस्ट्री के दूसरे सीईओ के साथ भी बातचीत करेंगे।
अमेरिका, कनाडा, लैटिन अमेरिका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, अफ्रीका, एशिया और सीआईएस देशों के सीईओ की मेजबानी के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं। प्रधानमंत्री का भाषण हिंदी में होगी और इसका अंग्रेजी के साथ प्रमुख भाषाओं जैसे जर्मन, फ्रेंच, जापानी और रूसी भाषा में अनुवाद किया जाएगा।
शो के लिए विज्ञान भवन में डिजिटल वाल तैयार की जा रही है। भारत में कारोबार करना आसान बनाने के लिए अब तक सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को दिखाने के लिए कुछ ऑडियो विजुअल चलाए जाएंगे।
हाल में नरेंद्र मोदी सरकार ने सेना और वायुसेना के लिए 197 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर खरीदने का 6,000 करोड़ रुपये का सौदा रद्द कर दिया।
सरकार का यह फैसला देश में मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। सरकार चाहती है कि विदेशी कंपनियां भारत आएं ओर यहां मैन्यूफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित कर निर्माण करें। सरकार ने इसके लिए रक्षा क्षेत्र में एफडीआई के नियमों में बदलाव किया और इसे काफी उदार बनाया है।
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वैश्विक कंपनियों की मदद से रक्षा क्षेत्र में मैन्यूफैक्चरिंग गतिविधियों को बढ़ावा देना सरकार के एजेंडे में है। प्रधानमंत्री का पहले दिन से इस बात पर जोर है कि भारत को हाई इंड टेक्नोलॉजी उत्पादों और रक्षा उत्पादों के लिए मैन्यूफैक्चरिंग बेस बनना चाहिए।
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इससे न सिर्फ रोजगार पैदा होगा बल्कि कुशल श्रम शक्ति का इस्तेमाल सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसी तरह से यह सुनिश्चित करने पर भी फोकस होना चाहिए कि कम से कम एक दर्जन घरेलू कंपनियों को मल्टीनेशनल कंपनियों का दर्जा मिले और उम्मीद की जा रही है कि प्रधानमंत्री प्रायरिटी सेक्टर का उल्लेख करेंगे, जिन पर सरकार का ज्यादा फोकस होगा।
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वैश्विक कंपनियों जैसे यूरोपीय एयरक्राफ्ट मैन्यूफैक्चरर एयरबस, जर्मनी की कार निर्माता कंपनी मार्सिडीज-बेंज, दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और जपान की कंपनी होंडा मोटर कंपनी के प्रमुख इस मौके पर नई नीतियों से रूबरू होंगे।
सरकार ने दुनिया भर की 3000 से अधिक मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों की पहचान की है। सरकार अभियान के दौरान इन कंपनियों को भारत में निवेश करने और मैन्यूफैक्चरिंग फैसलिटी लगाने के लिए प्रोत्साहित करेगी।
उम्मीद की जा रही है कि नरेंद्र मोदी ऑडिएंश के तौर पर मौजूद सीईओ को देश में मैन्यूफैक्चरिंग गतिविधियों के लिए वातावरण को बेहतर बनाने उठाए जा रहे या आगामी दिनों में उठाए जाने वाले कदमों के बारे में बताएंगे। इसके तहत सरकार सेक्टर के डिलाइसेंसिंग और नियंत्रमुक्त करने के अलावा निवेशकों की चिंताओं के समाधान के लिए तेजी से रिस्पांस देने वाले तंत्र पर भी फोकस करेगी।
प्रधानमंत्री इस मौके पर डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन (डीआईपीपी) की वेबसाइट पर ‘इनवेस्टर वाल ’ पहल भी शुरू कर सकते हैं।
इससे निवेशकों और विभाग के अधिकारियों के बीच सीधे और रियल टाइम बातचीत हो सकेगी। बाद में प्रधानमंत्री दूसरे मंत्रियों के साथ लंच के बाद चाय पर इंडस्ट्री के दूसरे सीईओ के साथ भी बातचीत करेंगे।
अमेरिका, कनाडा, लैटिन अमेरिका, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूरोप, अफ्रीका, एशिया और सीआईएस देशों के सीईओ की मेजबानी के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं। प्रधानमंत्री का भाषण हिंदी में होगी और इसका अंग्रेजी के साथ प्रमुख भाषाओं जैसे जर्मन, फ्रेंच, जापानी और रूसी भाषा में अनुवाद किया जाएगा।
शो के लिए विज्ञान भवन में डिजिटल वाल तैयार की जा रही है। भारत में कारोबार करना आसान बनाने के लिए अब तक सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को दिखाने के लिए कुछ ऑडियो विजुअल चलाए जाएंगे।
हाल में नरेंद्र मोदी सरकार ने सेना और वायुसेना के लिए 197 लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर खरीदने का 6,000 करोड़ रुपये का सौदा रद्द कर दिया।
सरकार का यह फैसला देश में मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। सरकार चाहती है कि विदेशी कंपनियां भारत आएं ओर यहां मैन्यूफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित कर निर्माण करें। सरकार ने इसके लिए रक्षा क्षेत्र में एफडीआई के नियमों में बदलाव किया और इसे काफी उदार बनाया है।