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भारी राजकोषीय घाटा अर्थव्यवस्था को दे सकता है झटका : मूडीज
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Thu, 19 Jun 2014 09:38 PM IST
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ग्लोबल साख निर्धारण एजेंसी मूडीज ने कहा है कि भारी राजकोषीय घाटे के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था को झटका लग सकता है। एजेंसी के मुताबिक देश की ऋण साख (क्रेडिट रेटिंग) अगले महीने पेश होने वाले आम बजट में व्यय कम करने के उपायों पर निर्भर करेगी। साथ ही ग्लोबल स्तर पर कमोडिटी की कीमतों में आने वाली तेजी से निपटने को लेकर सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों का भी इसपर असर पड़ेगा।
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मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राजस्व संग्रह में गिरावट, भारी-भरकम सरकारी खर्च और कमोडिटी की कीमतों में आने वाली तेजी से निपटने के लिए बजट में सरकार की ओर से किए जाने वाले उपायों के आधार पर ही देश की क्रेडिट रेटिंग को निर्धारित किया जा सकेगा। मूडीज के मुताबिक देश का बजट घाटा बहुत अधिक है और इससे आर्थिक असंतुलन बढे़गा और इससे अर्थव्यवस्था को झटके लग सकते हैं।
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उसने कहा है कि भारत की वित्तीय स्थिति और आने वाले बजट पर लगातार चर्चा जारी है। राजकोषीय घाटे को कम करने के उपाय नहीं किए जाने पर ऊंची विकास दर हासिल नहीं की जा सकेगी। बजट से ही संकेत मिलेगा कि भारत की क्रेडिट रेटिंग पर वित्तीय घाटे के दबाव को आने वाले वर्षों में कैसे कम किया जा सकेगा।
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मूडीज भारत की क्रेडिट रेटिंग को बीएए-थ्री ग्रेड के साथ ही आगे के लिए स्थिर श्रेणी में रखे हुए है। उसने कहा है कि भारत का उच्च बजट घाटा देश की बड़ी आबादी और प्रति व्यक्ति कम आय के कारण है। कम आय की वजह से सरकार के कर राजस्व में वृद्धि नहीं हो रही है, जबकि सामाजिक राजनीतिक दबाव की वजह से सब्सिडी और आर्थिक विकास पर सरकारी व्यय बढ़ता जा रहा है।
मूडीज ने कहा कि प्रति व्यक्ति कम आय वाले दूसरे देशों में बजट घाटे से बचने की कोशिश की जाती है। वित्तीय अनुशासन को अपनाकर ढांचागत चुनौतियों के बावजूद बजट घाटे को कम किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंचे बजट घाटे की वजह से देश में महंगाई भी बढ़ी है और इससे वर्ष 2011 से 2013 के दौरान चालू खाते का घाटा भी बढ़ा था। इसकी वजह से वर्ष 2011 से विकास दर में भी कमी आई थी।