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भारी बारिश का कहर: महंगे होंगे फल और सब्जियां
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 19 Jun 2013 10:07 PM IST
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हिमाचल और उत्तराखंड में बारिश के कहर ने खेती और बागवानी को तहस-नहस कर दिया है। कृषि आयुक्त का कहना है कि इन राज्यों में बड़े पैमाने पर खेती योग्य भूमि कटाव में बह गई है।
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इसके अलावा गंगा-यमुना के कई मैदानी इलाकों में बाढ़ से सब्जियों को भारी नुकसान हुआ है। बारिश की मार के चलते फल और सब्जियों के दाम आसमान छू सकते हैं। इससे खुदरा महंगाई की आग और ज्यादा भड़केगी।
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भारी बारिश और बाढ़ से खरीफ की बुवाई में देरी
इस साल अच्छे मानसून से बढ़िया पैदावार की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। पर्वतीय इलाकों में हो रही भारी बारिश से यूपी और हरियाणा के कई मैदानी इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं।
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समय से पहले आ पहुंचे मानसून और औसत से कहीं ज्यादा बारिश खरीफ की बुवाई में देरी का सबब बन सकती है। उफनती नदियों ने हजारों हेक्टेयर क्षेत्र की कृषि योग्य भूमि को बर्बाद कर दिया है। गन्ने, हरे चारे और सब्जियों को भी भारी नुकसान हुआ है।
कृषि आयुक्त डॉ. जेएस संधू ने बताया कि जिस तरह उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है, उससे खरीफ की बुवाई में एक या दो सप्ताह की देरी हो सकती है।
हालांकि, धान की रोपाई के लिहाज से बारिश फायदेमंद है लेकिन भारी बारिश और बाढ़ से सब्जियों के अलावा गन्ने और गर्मियों में बोई जाने वाले मूंग को भी नुकसान हो सकता है।
जिन इलाकों में बारिश सामान्य है वहां अगले सप्ताह तक धान की रोपाई में तेजी आएगी लेकिन ज्यादा बारिश वाले इलाकों में ग्वार, बाजरा, मक्का और अरहर की बुवाई में देरी हो सकती है।
संधू का कहना है कि बाढ़ से निपटने के लिए राज्यों को अलर्ट कर दिया गया है। कृषि मंत्रालय को मिली सूचनाओं के अनुसार, अभी तक धान की सिर्फ 20 फीसदी बुवाई हुई है। अगले सप्ताह तक धान की बुवाई में तेजी आ जाएगी। समय से पहले पहुंचे मानसून से मध्य और दक्षिण भारत में कपास की बुवाई को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक (फसल) डॉ. स्वप्न कुमार दत्ता का कहना है कि अच्छी बारिश के बाद किसान खेत में सीधे धान की बुवाई कर सकते हैं। इससे 3 हफ्ते का समय बच जाएगा।
यूपी में करीब 30 फीसदी गन्ना गेहूं की कटाई के बाद बोया जाता है, जिस पर भारी बारिश की मार पड़ी है। अगले दो हफ्तों के दौरान अगर और ज्यादा बारिश होती है तो गन्ने की फसल को भारी नुकसान होना तय है।
वहीं, चारे के तौर पर बोई जाने वाली ज्वार और बाजरा की फसल भी ज्यादा बरसात से खराब हुई है। अगले कुछ महीनों के दौरान किसानों को चारे की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।