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डीजल वाहनों पर लग सकता है भारी उत्पाद शुल्क

Fri, 18 Jan 2013 09:23 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 18 Jan 2013 09:23 PM IST
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heavy excise duty on diesel vehicles
आगामी वित्त वर्ष में डीजल वाहनों पर सरकारी नीतियों की दोहरी मार पड़ सकती है। पेट्रोलियम मंत्रालय के सुझाव पर अगर वित्त मंत्रालय ने गौर किया तो डीजल मूल्य पर से सरकारी नियंत्रण हटने के बाद अब डीजल वाहनों के उत्पाद शुल्क में भारी इजाफा भी हो सकता है।
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सूत्रों की माने तो पेट्रोलियम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को आगामी बजट में इस बाबत निर्णय लेने का सुझाव दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक पैसेंजर, व्यावसायिक और भारी वाहनों के लिए अगल-अलग श्रेणी बनाकर उत्पाद शुल्क बढ़ाने का सुझाव दिया गया है।

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इसके अलावा छोटे वाहनों और बड़े वाहनों के लिए उत्पाद शुल्क की दरें अलग रखने को कहा गया है। अंडर रिकवरी कम करने के लिए यह प्रस्ताव काफी अहम माना जा रहा है। पहले ही डीजल के दाम खुदरा उपभोक्ताओं और थोक ग्राहकों के लिए अलग-अलग बढ़ा कर तेल कंपनियां करीब 15 हजार करोड़ रुपये सालाना सब्सिडी बचत का अनुमान लगा चुकी हैं।
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अगर उत्पाद शुल्क में इजाफा किया जाता है, तो सरकारी खजाने में बड़ी रकम आने का एक और रास्ता खुल जाएगा। गौरतलब है कि मंत्रालय पिछले वर्ष भी बजट पूर्व बैठक में डीजल वाहनों पर उत्पाद शुल्क लगाने की सलाह दे चुका है। लेकिन ऑटो उद्योग के दबाव में इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका था।


फिलहाल ऑटो उद्योग डीजल के दाम में इजाफा और थोक खरीदारी बाजार मूल्य पर करने के सरकार के निर्णय से खुश है, लेकिन डीजल वाहनों के उत्पाद शुल्क में इजाफे से सहमत नहीं है। उधर वित्त मंत्रालय सरकार के सब्सिडी बोझ कम करने के लिए हरसंभव प्रयास में जुटा हुआ है।

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