बैंक से कर्ज लिया है, तो हो जाएं सावधान
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बैंकों के कर्ज न चुकाने वालों पर अप्रैल से ज्यादा सख्ती होने वाली है। बढ़ते डूबते कर्ज को देखते हुए बैंक अब न केवल कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग से बचेंगे, बल्कि नए कर्ज देने की प्रणाली को भी सख्त करेंगे।
बैंकों के डूबते कर्ज में लगातार हो रहे इजाफे को देखते हुए रिजर्व बैंक ने एक अप्रैल 2014 से बैंकों के नए नियम लागू करने के निर्देश दे रखे हैं। इन नियमों के लागू होने से जहां जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों के लिए कर्ज महंगा हो जाएगा, वहीं बड़े कर्ज की निगरानी बैठकों के साथ रिजर्व बैंक भी करेगा।
दिसंबर 2013 तक बैंकों के डूबे कर्ज की राशि 2.43 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी थी। कर्ज चुका पाने में असमर्थ कॉरपोरेट के तरफ से सीडीआर सेल में मांग 2.89 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
खातों की निगरानी करेगा आरबीआई
इसे देखते हुए रिजर्व बैंक बड़े कर्ज वाले खातों की निगरानी के लिए एक सेंट्रल रिपॉजिटरी बनाएगा। इसमें पांच करोड़ रुपये से ज्यादा कर्ज लेने वाले खाताधारकों की जानकारी होगी।
इसके अलावा बैंकों को खराब हो रहे एसेट को गैर निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) बनने से पहले स्पेशल मेंशन अकाउंट के नाम से वर्ग बनाना होगा।
1 अप्रैल 2014 से नए नियम लागू होने के सवाल पर बैंक ऑफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि बैंक रिस्ट्रक्चरिंग करने से बचेंगे। इसके अलावा शुरुआती तिमाही में बैंकों का एनपीए भी तेजी से बढ़ेगा।
कर्ज न चुकाने पर हो सकती है मुश्किल
ऐसे बड़े कर्ज, जिसकी ईएमआई से 61-90 दिनों से नहीं मिल रही है, उस तरह के खातों के लिए बैंकों को मिलकर एक संयुक्त कर्जदाता फोरम बनानी होगी।
इस फोरम के अंतर्गत वसूली के लिए बैंक तेजी से कार्रवाई करने के कदम उठा सकेंगे। इसमें बैंकों के कनशोर्शियम नियम भी लागू हो सकेंगे।
हालांकि संयुक्त कर्जदाता फोरम प्रमुख रूप से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज पर बनाना अनिवार्य होगा।