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एनबीएफसी के लिए सख्त होंगे मानक

नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 28 Dec 2012 11:34 PM IST
has strict standards for nbfc
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नए वित्तीय वर्ष से गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए सख्त मानक लागू करने की तैयारी है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा एनबीएफसी के लिए जारी मसौदा दिशानिर्देश के बाद इसकी संभावना और बढ़ गई है। इस संबंध में अंतिम फैसला भारतीय रिजर्व बैंक वित्त मंत्रालय की सलाहकार समिति के साथ बैठक कर करेगा।
वित्त मंत्रालय की सलाहकार समिति के एक सदस्य के अनुसार आरबीआई ने ड्रॉफ्ट नियम पर 10 जनवरी तक सबकी राय मांगी है। उसके बाद आरबीआई के साथ सलाहकार समिति की एक बैठक होगी। इसके बाद रिजर्व बैंक नियमों को अंतिम रूप देगा। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के कारोबार संबंधी नियम बनाने के लिए रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर ऊषा थोराट की अध्यक्षता में वर्किंग ग्रुप बना था।

जिसकी सिफारिशें आने के बाद अब मसौदा दिशानिर्देश पेश किया गया है। इसमें ऐसे कई प्रावधान हैं, जिससे छोटी एनबीएफसी के कारोबार पर काफी हद तक असर पड़ सकता है। आरबीआई ने कहा है कि केवल वही कंपनियां पब्लिक डिपॉजिट ले सकेंगी, जिन्हें किसी रेटिंग एजेंसी से रेटिंग मिली हो, इसे प्राप्त करने के लिए मौजूदा गैर रेटिंग प्राप्त कंपनियों को एक साल का वक्त मिलेगा।

इसके अलावा, आरबीआई ने गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) के संबंध में बैंकों के समान मानक बनाने की बात कही है। हालांकि इसे चरणबद्ध तरीके से तीन साल में लागू करने की बात कही गई है। अभी एनबीएफसी के ऐसे कर्ज जो नहीं चुकाए जा रहे हैं वह 180 दिन बाद एनपीए में परिवर्तित हो जाते हैं। नए नियम में यह सीमा 90 दिन की हो जाएगी।

प्रोविजनिंग के लिए भी आरबीआई ने सीमा मौजूदा 0.25 फीसदी से बढ़ाकर 0.40 फीसदी करने की बात कही है। इसी तरह, इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को फाइनेंस करने वाली कंपनियों को छोड़कर सभी एनबीएफसी को एक अप्रैल 2014 से कैपिटल एडिक्वेशी रेशियो के रेट को 12 फीसदी करने का प्रस्ताव है।

एडवाइजरी समिति के सदस्य ने बताया कि आरबीआई एनबीएफसी सेक्टर को और नियमित करना चाहता है। हालांकि प्रस्ताव में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिससे छोटी कंपनियों के अस्तित्व पर ही असर पड़ सकता है। ऐसे में आरबीआई के साथ चर्चा में इन सब पहलुओं पर भी ध्यान दिया जाएगा।

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