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गुजरात मॉडल पर गांवों में बिजली पहुंचाने की तैयारी
सुजय मेहदूदिया/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 20 Jun 2014 01:12 AM IST
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मोदी सरकार गांवों में गुजरात मॉडल पर बिजली पहुंचाने की तैयारी में है। ऊर्जा क्षेत्र में खामियों को दूर करने के अपने संकल्प को दोहराते हुए केंद्रीय ऊर्जा एवं कोयला मंत्री पीयूष गोयल ने मंत्रालय के अधिकारियों से गुजरात मॉडल पर ग्रामीण भारत और गांवों के विद्युतीकरण के लिए ‘एक्शन प्लान’ तैयार करने को कहा है।
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इसमें देश में कृषि और गैर कृषि कार्यों के इस्तेमाल के लिए अलग-अलग फीडर लाइनों की प्रणाली सुनिश्चित करना शामिल है।
एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में बिजली ले जाने की गंभीर समस्या को देखते हुए गोयल ने अंतरराज्यीय ट्रांसमिशन लाइनों को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है। इसके साथ ही उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की फंडिंग के लिए पेंशन फंडों का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया है।
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पदभार संभालने के तुरंत बाद गोयल ने ‘ज्योतिग्राम योजना’ का अध्ययन करने के लिए गुजरात का दौरा किया था और वह इससे बेहद प्रभावित हुए थे।
गोयल ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने के लिए गुजरात सरकार की ज्योतिग्राम योजना को अपनाने का प्रस्ताव दिया है। इस योजना के अंतर्गत गुजरात में कृषि और गैर कृषि उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग फीडर लाइनें हैं। इससे किसानों को बिना किसी बाधा के पर्याप्त बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होती है।
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नियमित तौर पर निश्चित घंटों तक निरंतर और फुल वोल्टेज बिजली आपूर्ति के जरिए यह मॉडल किसानों के लिए उनके सिंचाई कार्यक्रम, जल संरक्षण, पंप रखरखाव खर्च में कमी और श्रम के अधिक प्रभावी इस्तेमाल को संभव बनाता है।
हालांकि, ऊर्जा मंत्री ने यह भी कहा कि इस मॉडल को पूरे देश में ठीक इसी रूप में नहीं दोहराया जा सकता है। गोयल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभिन्न राज्यों में इस योजना को लागू करने के लिए ‘गुजरात मॉडल’ में कुछ बदलावों की आवश्यकता होगी। इसमें बिजली की कमी वाले राज्यों जैसे राजस्थान और सीमांध्र वाले हिस्से पर खास ध्यान देना होगा।
गोयल ने अधिकारियों से कहा है कि योजना को विभिन्न राज्यों में प्रभावी बनाने के लिए इसमें किन बदलावों की जरूरत होगी, इसका अध्ययन किया जाए। जिससे कि देश में कृषि के लिए 8 घंटे और घरेलू इस्तेमाल के लिए 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
इसी तरह, अक्षय ऊर्जा स्रोतों से उत्पन्न अतिरिक्त बिजली बेचने के लिए राज्यों को सक्षम बनाने के लिए गोयल ने ग्रीन पावर की सीधे बिक्री का सुझाव दिया है।
एक आंतरिक मूल्यांकन बैठक के दौरान गोयल ने कहा कि अक्षय ऊर्जा की सीधे बिक्री से उत्पादकों को बिजली की अधिक कीमत मिल सकेगी। जबकि, मौजूदा नियमों के तहत गुजरात जैसे बिजली सरप्लस राज्य कम विनिमय कीमत के कारण अतिरिक्त बिजली बेचने में समर्थ नहीं हैं। उन्होंने इस बात के संकेत दिए कि इस मामले पर जल्द ही नीतिगत पहल की जाएगी, जिसमें जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) भी शामिल होगी।
अक्षय ऊर्जा क्षेत्र को रफ्तार देने के लिए गोयल ने मंत्रालय में संयुक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार को सौर उपकरणों के आयात पर एंटी डंपिंग शुल्क की तत्काल समीक्षा करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ऑफ-ग्रिड अक्षय ऊर्जा मॉडल को लागू करने के लिए घरों एवं माइक्रो ग्रिड मॉडल की क्षमता और टैरिफ के लागत की समीक्षा करेगा। इस मॉडल को गुजरात में सफलतापूर्वक लागू किया गया है।
देश में कमजोर ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को मजबूत बनाने के लिए गोयल ने पेंशन फंड के इस्तेमाल की संभावनाएं तलाशने के निर्देश वरिष्ठ अधिकारियों को दिए हैं। इसके अलावा, गोयल ने कहा कि ऊर्जा मंत्रालय का वितरण विभाग देश के लिए स्मार्ट ग्रिड कार्यान्वयन योजना की व्यावहारिक अध्ययन रिपोर्ट तैयार करेगा।