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'विकास दर 2014 तक पहुंचेगी 7.2 फीसदी'

Thu, 29 Nov 2012 09:24 PM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Thu, 29 Nov 2012 09:24 PM IST
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growth rate will reach 7.2 percent by 2014

निवेश बैंकिंग के कारोबार से जुड़ी दिग्गज ग्लोबल फर्म गोल्डमैन सॉक्स ने 2013 में भारत की आर्थिक विकास दर 6.5 फीसदी रहने और 2014 में इसके 7.2 फीसदी के स्तर पर पहुंचने का अनुमान जताया है। उसने विदेशों में भारतीय मांग में मजबूती के आसार और घरेलू स्तर पर ढांचागत सुधारों के चलते आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की बात कही है।

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गोल्डमैन सॉक्स ने अपने एक शोध पत्र में कहा कि देश की आर्थिक विकास दर में धीरे-धीरे तेजी आएगी। 2013 में 6.5 फीसदी पर और उसके बाद 2014 तक 7.2 फीसदी पर पहुंच जाएगी। बैंक ने कहा है कि विकास दर में यह तेजी वित्तीय हालात बेहतर होने से नहीं, बल्कि नीतिगत दरों में कमी, कृषि उपज के सामान्य रहने और सुधार की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से आर्थिक भरोसा बढ़ने के चलते आएगी।
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रिपोर्ट में रिजर्व बैंक द्वारा 2013, 2015 और 2015 ब्याज दरों में आधे-आधे फीसदी की कटौती का अनुमान जताया गया है। इसके अलावा गोल्डमैन सॉक्स ने कहा है कि सरकार की ओर से यदि आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के कदम जारी रहते हैं तो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 5.4 फीसदी के मौजूदा स्तर से बढ़ कर 2014 में 7.2 फीसदी पर पहुंच जाएगी और 2015-16 तक इसमें बढ़त जारी रहेगी।
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हालांकि इसके लिए आर्थिक सुधारों में निरंतरता बनाए रखना बहुत जरूरी होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि रिटेल में एफडीआई की अनुमति, वस्तु एवं सेवाकर लागू करना, सब्सिडी का नकद हस्तांतरण और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना आर्थिक विकास दर में तेजी लाने में मददगार साबित होंगी। हालांकि इस तेजी को बनाए रखने के लिए आगे भी आर्थिक सुधारों का सिलसिला बनाए रखना होगा।


रिपोर्ट में सरकार की ओर से पिछले दिनों मल्टी ब्रांड रिटेल और विमानन क्षेत्र में एफडीआई की मंजूरी देने, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी, सब्सिडी पर मिलने वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या सीमित किए जाने, पेंशन सेक्टर को विदेशी निवेश के लिए खोलने और बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 49 फीसदी करने के फैसलों को आर्थिक हालात में सुधार लाने वाला बताते हुए इनकी सराहना की गई है। हालांकि रिपोर्ट में आर्थिक सुस्ती, ऊंची महंगाई दर और सरकारी घाटा अधिक होने के चलते अल्पावधि के लिए देश के आर्थिक परिदृश्य को कठिनाई भरा बताया गया है।

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