{"_id":"2a5f52b6-6894-11e2-93f9-d4ae52bc57c2","slug":"growth-rate-will-be-6-7-percent-in-next-financial-year","type":"story","status":"publish","title_hn":"अगले वित्त वर्ष में 6.7 फीसदी रहेगी विकास दर","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
अगले वित्त वर्ष में 6.7 फीसदी रहेगी विकास दर
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jan 2013 08:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश के आर्थिक परिदृश्य पर उद्योग संगठन फिक्की द्वारा कराए गए एक सर्वे के मुताबिक आगामी वित्त वर्ष 2013-14 में देश की आर्थिक विकास दर 6.7 फीसदी रह सकती है, जबकि मुद्रास्फीति दर 7 फीसदी तक रहने का अनुमान है।
विज्ञापन
सर्वे में यह अनुमान नीतिगत दरों में कटौती की संभावना के आधार पर लगाया गया है। माना जा रहा है कि नीतिगत दरों में कटौती का औद्योगिक विकास दर और घरेलू खपत पर सकारात्मक असर होगा।
विज्ञापन
फिक्की की अध्यक्ष नैना लाल किदवई ने कहा है कि उद्योग जगत सरकार की सुधारवादी नीति से आशान्वित है। फिक्की के सर्वे के मुताबिक ज्यादातर उद्यमियों ने 29 जनवरी को होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर और सीआरआर में आधा फीसदी तक की कटौती का अनुमान लगाया है। जबकि अगले वित्त वर्ष में रेपो दर में करीब एक फीसदी कटौती की संभावना है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि दिसंबर में मुद्रास्फीति दर में कमी आने से प्रमुख ब्याज दरों में कटौती की संभावना नजर आ रही है। ऐसा करना विकास दर को रफ्तार देने के लिए भी जरूरी है। इसके अलावा संगठन ने वित्त वर्ष 2013-14 में 5.1 फीसदी राजकोषीय घाटे का अनुमान लगाया है। जबकि चालू खाता घाटा 4 फीसदी तक रहने की संभावना भी जताई है।
'केलकर समिति की सिफारिशों पर अगले वित्त वर्ष में गौर किया गया तो इससे घाटा कम करने में मदद मिल सकेगी। जबकि आरबीआई द्वारा प्रमुख दरों में कटौती हुई तो यह उद्योग जगत के लिए ऑक्सीजन का काम करेगी।'
- नैना लाल किदवई, फिक्की अध्यक्ष