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खर्च में कटौती पड़ी विकास दर पर भारी

Mon, 11 Feb 2013 01:01 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 11 Feb 2013 01:01 PM IST
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growth rate was heavy on spending cuts

राजकोषीय घाटे को सीमित रखने के लिए सरकारी खर्चों पर ब्रेक लगाना विकास दर पर भारी पड़ रहा है। आर्थिक सुस्ती के बीच विभागों के खर्चों में भारी कटौती ने वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में सकल घरेलू उत्पाद को बुरी तरह प्रभावित किया है।

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वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने पिछले कई महीनों से सामाजिक योजनाओं के साथ-साथ सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के खर्चों पर भी अंकुश लगाया हुआ है। आंकड़ों के अनुसार दिसंबर तक योजना व्यय बजट अनुमान का करीब 57 फीसदी रहा है जबकि गैर योजना बजट अनुमान की तुलना में 72 फीसदी हुआ है। राजकोषीय स्थिति को दुरुस्त करने में जुटे वित्त मंत्रालय ने खर्चों में कटौती के निर्देश दिया है। बजट की ज्यादातर राशि को साल के आखिरी महीनों में खर्च करने पर भी मंत्रालय ने अंकुश लगा दिया है।
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अब आखिरी तिमाही में बजट राशि का 33 फीसदी और मार्च में कुल बजट आवंटन का 15 फीसदी से ज्यादा खर्च नहीं किया जा सकता है। वित्त वर्ष के दौरान जहां विकास दर घटकर 5 फीसदी रहने का अनुमान लगाया जा रहा है, वहीं आर्थिक सुस्ती और सरकारी खर्च में कटौती के चलते दिसंबर तिमाही के दौरान विकास दर सिर्फ 4.75 के आसपास ही रह सकती है।
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गत अगस्त में वित्त मंत्री का पदभार ग्रहण करने के बाद से ही पी. चिदंबरम ने राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 5.3 फीसदी तक नियंत्रित करने पर काफी जोर दिया है। लेकिन आर्थिक सुस्ती के माहौल में सरकारी योजनाओं और सड़क, सुरक्षा और बुनियादी ढांचागत क्षेत्र के खर्च में कटौती ने अर्थव्यवस्था की सुस्ती को बढ़ाने का काम किया है।

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