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कर विसंगतियों से बढ़ रहा तंबाकू का अवैध कारोबार

Wed, 15 Oct 2014 08:35 AM IST
नई दिल्ली/ ब्यूरो
नई दिल्ली/ ब्यूरो Updated Wed, 15 Oct 2014 08:35 AM IST
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Growing illegal trade in tobacco

तंबाकू और उससे बने उत्पादों के इस्तेमाल को घटाने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे तमाम प्रयासों के बावजूद न केवल खपत में बढ़ोतरी होती दिख रही है, बल्कि देश में इनका अवैध कारोबार भी साल दर साल बढ़ता जा रहा है।

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इस पर लगाम लगाने के लिए सरकार और स्वयं सेवी संगठनों की ओर से ज्यादा बेहतर ढंग से जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। इसके साथ ही तंबाकू उत्पादों पर लगने वाले कर की विसंगतियों को दूर करना भी इसमें काफी कारगर हो सकता है। यह बात उद्योग संगठन एसोचैम और रिसर्च फर्म केपीएमजी की एक साझा रिपोर्ट में कही गई है।
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एसोचैम के महासचिव डीएस रावत के मुताबिक दुनिया और भारत में तंबाकू के इस्तेमाल की प्रवृत्ति (पैटर्न) में काफी अंतर है। भारत में तंबाकू की कुल खपत का करीब 85 फीसदी चबाने वाले तंबाकू उत्पादों और बीड़ी के रूप में है।
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इसके विपरीत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तंबाकू का सबसे ज्यादा इस्तेमाल सिगरेट के रूप में किया जाता है। एक बड़ा विरोधाभास यह भी है कि देश में तंबाकू उत्पादों पर कर की करीब 85 फीसदी वसूली सिगरेट पर लगने वाले कर से प्राप्त होती है, जबकि तंबाकू खपत में सिगरेट की हिस्सेदारी महज 15 फीसदी के करीब ही है।

रिपोर्ट के मुताबिक देश में तंबाकू के इस्तेमाल में कमी लाने के लिए ज्यादा प्रभावशाली जागरूकता अभियान चलाने के साथ करों में विसंगति को दूर करना भी जरूरी है। मौजूदा कर प्रावधानों के तहत देश में 65 मिलीमीटर से कम लंबाई की छोटी सिगरेटों पर 1,185 रुपये प्रति हजार की दर से उत्पाद शुल्क लगता है। फिल्टर युक्त बड़ी सिगरेटों पर कर की दर 3,389 रुपये प्रति हजार है।

दूसरी ओर बीड़ी पर कर की दरें काफी कम है। मशीन के इस्तेमाल के बिना बनाई जाने वाली बीड़ियों पर 16.33 रुपये प्रति हजार की दर से कर लगता है। मशीन से बनी बड़ी पर कर की दर 28.69 रुपये प्रति हजार है। इसमें भी गौर करने वाली बात यह है कि किसी कंपनी द्वारा हाथ से बनने वाली ब्रांड रहित बीड़ी का सालाना उत्पादन 20 लाख बीड़ियों से कम है, तो उसे कोई कर नहीं अदा करना पड़ता।


रिपोर्ट के मुताबिक तंबाकू उत्पादों पर कराधान में यह असमानता खपत में कमी न हो पाने की एक बड़ी वजह है, क्योंकि भारत में तंबाकू का ज्यादातर इस्तेमाल बीड़ी और चबाने वाले तंबाकू के रूप में होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी लागू होने से इस विसंगति में कमी लाने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसमें यह ध्यान रखना होगा कि सभी राज्यों में लगने वाली कर की प्रभावी दरों में असमानता न रहने पाए।

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