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बर्बाद हुआ ढाई लाख गरीबों के साल भर का अनाज

Wed, 08 May 2013 12:04 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Wed, 08 May 2013 12:04 AM IST
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grain of poor people wasted in warehouses

उच्चतम न्यायालय की कड़ी फटकार के बावजूद भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में अनाज बर्बाद होने की घटनाओं में कमी नहीं हुई है।

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पिछले तीन वर्षो के दौरान एफसीआई के गोदामों में लगभग 19,534 टन अनाज खराब हुआ। इससे लगभग ढाई लाख गरीबों का साल भर पेट भरा जा सकता था।

सरकार ने माना कि एफसीआई के गोदामों में अनाज खराब होने की वजह प्रबंधन की कमी थी। गोदामों में पानी का रिसाव, कीड़ों का लगना और कर्मचारियों की लापरवाही मुख्य कारण थे।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रो. केवी थॉमस ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में बताया कि वर्ष 2009-10 से एक अप्रैल 2013 तक एफसीआई के गोदामों में 19534 टन अनाज बर्बाद हुआ है।
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उन्होंने कहा कि भंडारण के दौरान कीड़ों के संक्रमण, छत से पानी का रिसाव, अवैज्ञानिक तरीके से किए गए भंडारण के कारण नमी आने, बाढ़ और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते उक्त अनाज बर्बाद हुआ है।
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गौरतलब है कि एक व्यक्ति साल भर में 84 किलो अनाज की खपत करता है, तो इस हिसाब से खराब हुए अनाज से ढ़ाई लाख लोग साल भर अपना पेट भर सकते हैं।

थॉमस के मुताबिक अनाज को खराब होने से बचाने के लिए सरकार एफसीआई की भंडारण क्षमता में बढ़ोतरी के लगातार प्रयास कर रही है।

जुलाई तक सरकार को अनाज भंडारण के लिए लगभग 200 लाख टन अतिरिक्त भंडारण क्षमता की जरूरत होगी। भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने निजी उद्यमियों, केंद्रीय भंडारण निगम और राज्य भंडारण निगमों के जरिये भंडारण गोदामों के निर्माण के लिए निजी उद्यमी गारंटी योजना चला रही है।

निजी उद्यमी गारंटी योजना के तहत एफसीआई निर्मित गोदामों को दस वर्ष की अवधि के लिए किराए पर लेने की गारंटी देती है।

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