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पावर सेक्टर के लिए तैयार होगा ‘विजन प्लान’
नई दिल्ली/ सुजय मेहदूदिया
Updated Tue, 20 Jan 2015 09:12 AM IST
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समेकित ऊर्जा नीति तैयार करने को लेकर रेल मंत्री सुरेश प्रभु की अध्यक्षता में गठित सलाहकार समूह ने ऊर्जा मंत्रालय से केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को एक दृष्टि पत्र (विजन डाक्यूमेंट) तैयार करने का निर्देश देने को कहा है। यह कवायद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया अभियान और ऊर्जा क्षेत्र में साझा उपक्रम के लिए साझेदारी और तकनीकी उन्नयन को बढ़ावा देने के केंद्र सरकार के इरादे को अमल में लाने के उद्देश्य से की जा रही है।
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इसके अलावा सीईए को मैन्यूफैक्चरर्स को अगले 15 वर्षों के दौरान उत्पादन के लिए जरूरी उपकरणों के बारे में भी बताना होगा। इससे मैन्यूफैक्चरर को परियोजना के आर्थिक पहलुओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर में आने वाले खर्च का आकलन करने में मदद मिलेगी। उपकरणों और पुर्जों की इस सूची में प्रेशर पार्ट्स के लिए जरूरी कच्चा माल, हाई प्रेशर पाइपिंग टर्बाइन और जेनरेटर रोटरों की फोर्जिंग, टर्बाइन केसिंग, स्प्लिट रनर, जेनरेटिंग यूनिट के लिए स्पीड डिवाइस और पंप स्टोरेज प्लांट शामिल होंगे।
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सलाहकार समूह ने सीईए को कुछ सुझाव भी दिए हैं, जिनकी मदद से वह ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रियाओं और बिजली की मांग के बारे में सटीक आंकड़े दे सकेगा। इन सुझावों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बिजली की सीजनल मांग में आने वाले उतार-चढ़ाव के पूर्वानुमान, जिला व सर्किल स्तर पर आकलन तैयार करके सालाना आकलन को और अधिक स्पष्ट बनाना शामिल हैं। इसके अलावा सीईए को ऊर्ध्वगामी नजरिया अपनाने और गलतियों की गुंजाइश घटाने के लिए एक से ज्यादा मॉडलिंग तकनीकें अपनाने व व्यापक आधार वाले अनुमान पेश करने के साथ ही मांग के पूर्वानुमानों पर बराबर नजर रखने जैसे उपाय भी समूह की ओर से सुझाए गए हैं।
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रिपोर्ट में आकलन पेश करने के लिए सटीक और विस्तृत पड़ताल करने की बात भी कही गई है, ताकि कोयला खानों के विकास की योजना भी तैयार की जा सके। ज्यादा सटीक आकलन की जरूरत अगले चार वर्षों में कोयला उत्पादन को बढ़ाकर एक अरब टन तक पहुंचाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जताई गई है। इसके लिए सीएमपीडीआई और कोयला क्षेत्र से जुड़ी अन्य सहायक एजेंसियों द्वारा इस संबंध में किए जा रहे कामकाज से भी मदद लेने की सलाह भी सलाहकार समूह की ओर से दी गई है। इसके अलावा एक अरब टन कोयला उत्पादन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की पूर्ति में कोल इंडिया और इसकी सहायक कंपनियों की मदद के लिए इस क्षेत्र में अच्छा अनुभव रखने वाले बाहरी विशेषज्ञों की सेवाएं लेने की बात भी कही गई है।
सीईए को बिजली उत्पादन के क्षेत्र में तकनीकी उन्नयन और ज्ञान वर्धन के लिए ग्लोबल स्तर के संस्थानों को चिह्नांकित करके उनके साथ करार करने का भी सुझाव सलाहकार समूह की ओर से दिया गया है। इसके अलावा देश में बिजली उत्पादन के लिए मुख्य रूप से कोयले पर निर्भरता बने रहने और इससे जुड़ी पर्यावरण संबंधी चिंताओं को देखते हुए समूह ने सीईए को कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (सीसीएस) तकनीक अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाने को भी कहा है।