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कॉल ड्रॉप पर टेलीकॉम कंपनियों पर जुर्माना लगाने की तैयारी

Sat, 05 Sep 2015 01:24 AM IST
Updated Sat, 05 Sep 2015 01:24 AM IST
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Govt to fine telecom companies over call drop

कॉल ड्राप के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के बाद टेलीकॉम कंपनियों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है।

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दूरसंचार विभाग का मानना है कि ठोस कदम उठाए बगैर कॉल ड्रॉप की समस्या जारी रहेगी, इसलिए टेलीकॉम कंपनियों पर कॉल ड्रॉप के मामले में जुर्माना लगाने की तैयारी की जा रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री ने कॉल ड्रॉप की समस्या पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए इस समस्या को जल्द से जल्द दूर करने का निर्देश दिया था।

मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक सरकार प्रत्येक कॉल ड्रॉप पर टेलीकॉम कंपनियों से ग्राहकों को एक से पांच रुपये तक भुगतान करने को कह सकती है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) टेलीकॉम कंपनियों को यह भी कह सकता है कि कॉल ड्राप के बदले वह उपभोक्ताओं को टैरिफ में छूट दे या बिल में कॉल ड्रॉप से होने वाले नुकसान की भरपाई करे।
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यानी कि पोस्ट पेड वाले उपभोक्ताओं को बिल में नुकसान का समायोजन किया जाए वहीं प्री-पेड ग्राहकों को नुकसान के बदले अतिरिक्त कॉल मिले या उनकी दरें कम की जाए।
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ऑपरेटर कटौती के खिलाफ

Govt to fine telecom companies over call drop

ऑपरेटर पहले ही कह चुके हैं कि वे इस तरह की कटौती के खिलाफ  हैं। इस मामले में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने संबंधित पक्षों की राय जानने के लिए मसौदा जारी दिया है। इस पर कमेंट और काउंटर कमेंट क्रमश: 21 और 28 सितंबर तक दिया जा सकता है।

सरकार की तरफ इस बात की भी जांच की जा रही है कि टेलीकॉम कंपनियों की टैरिफ नीति से कॉल ड्राप के दौरान कहीं उन्हें आर्थिक फायदा तो नहीं हो रहा है। हालांकि निजी टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि कॉल ड्रॉप की समस्या जरूर होती है, लेकिन इससे उपभोक्ताओं को किसी प्रकार का आर्थिक नुकसान नहीं हो रहा है।

दिल्ली, मुंबई व अन्य बड़े शहरों में कॉल ड्रॉप की समस्या काफी तेजी से बढ़ रही है। टेलीकॉम कंपनियों की दलील है कि टेलीकॉम टावर की कमी से कॉल ड्राप की समस्या बढ़ती जा रही है।

कंपनियों ने हाल में सरकार से टावर को लेकर एकीकृत टावर नीति लाने की मांग की है।


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