फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   govt rules out regulation of air fares

एटीएफ पर कर कम कराने के लिए एविएशन और पेट्रो मंत्रालय एकमत

Wed, 05 Dec 2012 12:07 AM IST
नई दिल्ली/एजेंसी
नई दिल्ली/एजेंसी Updated Wed, 05 Dec 2012 12:07 AM IST
विज्ञापन
govt rules out regulation of air fares
हवाई ईंधन पर कर में कटौती पर आने वाले दिनों में सरकार बड़ा फैसला ले सकती है, जिसका फायदा यात्रियों को किराये में कमी के रूप में मिल सकता है। नागरिक उड्डयन मंत्री ने मंगलवार को पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली से मुलाकात कर इस मामले पर विचार-विमर्श किया। दोनों ही मंत्रालय इस पर सहमत भी हो गए हैं। लिहाजा दोनों मिलकर अब इस बारे में वित्त मंत्रालय के समक्ष प्रस्ताव (प्रेजेंटेशन) पेश करेंगे, क्योंकि इस पर आखिरी फैसला वित्त मंत्रालय को ही लेना है।
विज्ञापन


मोइली से मुलाकात के बाद अजित सिंह ने बताया कि  दोनों के बीच हवाई ईंधन (एटीएफ) पर वर्तमान में लागू 24 फीसदी वैट की जगह तीन से चार फीसदी केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगाने की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हुई है और मोइली इस पर राजी हैं। इस बारे फैसला वित्त मंत्रालय को करना है। दोनों मंत्रालय मिलकर वित्त मंत्रालय के सामने प्रजेंटेशन देंगे।

विज्ञापन

बढ़ते हवाई किरायों पर उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों और हवाई अड्डों के शुल्क में काफी बढ़ोतरी हुई हुई है।

ऐसे में एयरलाइंस की लागत में काफी इजाफे के चलते किरायों में बढ़ोतरी हुई है। सरकार का इसे अपने नियंत्रण में लेने का कोई इरादा नहीं है। अलबत्ता सरकार चाहती है कि किराए के निर्धारण की प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी बनाया जाए। यह बात नागरिक उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली से मुलाकात के बाद कही। अजित सिंह ने कहा कि हम केवल इस बात का प्रयत्न कर रहे हैं कि हवाई किरायों का निर्धारण एक पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाए। लोगों को यह मालूम होना चाहिए कि उनकी यात्रा का किराया किस आधार पर तय किया गया है और जो किराया उनसे लिया जा रहा है, वह पूरी तरह मुनासिब है।
विज्ञापन
विज्ञापन


किंगफिशर के बारे में उन्होंने कहा कि डीजीसीए ने स्पष्ट कर दिया है कि दोबारा उड़ान भरने की अनुमति पाने के लिए उन्हें अपने सुरक्षा व संचालन संबंधी इंतजामों और वित्तीय प्रबंधन को लेकर निदेशालय को पूरी तरह से आश्वस्त कराना होगा। उन्होंने माना कि किंगफिशर के उड़ान न भरने के चलते यात्रियों को परेशानी हो रही है, पर डीजीसीए की पहली चिंता सुरक्षा को लेकर है, जिससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इसके अलावा उसे अपने कर्मचारियों, तेल कंपनियों और और एयरपोर्ट ऑपरेटरों को उनके बकाये का भुगतान करना होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed