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जांच के भंवर में जेट-ऐतिहाद डील
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Tue, 02 Jul 2013 09:12 PM IST
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जेट-ऐतिहाद डील और अबू धाबी की हवाई सीटें बढ़ाने का मामला शिकायतों और सरकारी जांच के भंवर में फंसता दिख रहा है।
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कई पार्टी के सांसदों की शिकायतों के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने अबू धाबी के साथ हुए हवाई समझौते का कैबिनेट नोट रोक दिया है। पीएमओ ने चार संबंधित मंत्रालयों को जेट-ऐतिहाद डील से जुड़े मुद्दों की जांच के निर्देश भी दिए हैं।
इस बीच, प्रधानमंत्री कार्यालय ने जेट-ऐतिहाद सौदे को लेकर मंत्रालयों और पीएमओ के बीच मतभेद से इनकार किया है।
पीएमओ की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि प्रधानमंत्री द्विपक्षीय हवाई सेवा समझौते से न तो पल्ला झाड़ रहे हैं और न ही पीएमओ मुद्दे पर से यू-टर्न ले रहा है।
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जेट-ऐतिहाद सौदे के साथ ही भारत सरकार ने अबू धाबी की हवाई सीटों में 36,670 की बढ़ोतरी का समझौता किया था।
जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रमण्यन स्वामी, बीजेपी के जसवंत सिंह और सीपीआई के गुरुदास दासगुप्ता समेत कुल 6 सांसदों ने जेट-ऐतिहाद डील और हवाई सीटों के समझौते पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री को 7 पत्र लिखे हैं।
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हालांकि, पीएमओ ने दावा है कि इन पत्रों के आने से पहले ही प्रधानमंत्री ने अबू धाबी से हुए समझौते को कैबिनेट में पेश करने का निर्देश दे दिया था।
फिलहाल, नागर विमानन मंत्रालय के अलावा कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय और उद्योग व वित्त मंत्रालय के संबंधित विभाग जेट-ऐतिहाद सौदे की पड़ताल कर रहे हैं।
एविएशन क्षेत्र में सबसे बड़ा यह एफडीआई प्रस्ताव सेबी, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग और डीजीसीए जैसे नियामकों की कसौटी पर खरा उतरने के बाद ही आगे बढ़ेगा। जबकि अबू धाबी की बढ़ी सीटों के मामले पर भी कैबिनेट को फैसला लेना है। एविएशन क्षेत्र में एफडीआई से जुड़े सुरक्षा संबंधी सवालों की जांच का जिम्मा कैबिनेट सचिव को सौंपा गया है।
करीब 2,058 करोड़ रुपये में जेट की 24 फीसदी हिस्सेदारी ऐतिहाद को बेचने के बाद एयरलाइंस के नियंत्रण को लेकर कई पेच फंस रहे हैं।
सीपीएम सांसद सीताराम येचुरी की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति भी एयर इंडिया के हितों के खिलाफ अबू धाबी की सीटें बढ़ाने का मुद्दा उठा चुकी है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में अबू धाबी समझौते से सीधे तौर पर जेट-ऐतिहाद डील को फायदा पहुंचने की बात कही है।
डील पर हो रही है राजनीति: अजित सिंह
नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने जेट-ऐतिहाद डील का बचाव करते हुए इस पर उठ रहे सवालों को पूरी तरह राजनीतिक करार दिया है। उनका कहना है कि बीजेपी के कार्यकाल में हवाई सीटें बढ़ाने की जो नीति अपनाई गई थी, अभी भी उसी का पालन किया जा रहा है।
अबू धाबी की बढ़ी सीटों को जेट-ऐतिहाद सौदे के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। सेबी और एफआईपीबी जैसे नियामक जेट-ऐतिहाद सौदे इसकी जांच कर रहे हैं। कैबिनेट की मंजूरी से पहले इस प्रस्ताव को नियामक प्रक्रिया पर खरा उतरना होगा।
बड़े सवाल
:- जेट-ऐतिहाद डील के साथ ही क्यों बढ़ी अबू धाबी की सीटें?
:- सीटों के समझौता से पहले क्यों नहीं ली गई कैबिनेट की मंजूरी?
:- जेट-ऐतिहाद सौदे के दो महीने बाद पड़ताल क्यों?
:- अचानक कई मंत्रालय क्यों करने लगे डील की जांच?