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एयर इंडिया का फिलहाल निजीकरण नहीं

Tue, 11 Nov 2014 10:08 AM IST
नई दिल्ली/ ब्यूरो
नई दिल्ली/ ब्यूरो Updated Tue, 11 Nov 2014 10:08 AM IST
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govt. not going to privetise air india

घाटे में आकंठ डूबी कंपनी एयर इंडिया के निजीकरण की चर्चा के बीच केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू ने कहा है कि फिलहाल इसका निजीकरण नहीं किया जाएगा। पहले इसके प्रबंधन को चुस्त-दुरुस्त किया जाएगा। मंत्रालय के दो अन्य सार्वजनिक उपक्रमों भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) और पवनहंस लिमिटेड का विनिवेश किया जाएगा, ताकि इन्हें शेयर बाजारों में सूचीबद्ध कराया जा सके।

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नागरिक उड्डयन नीति के मसौदे को जारी करने के अवसर पर संवाददाताओं से बातचीत में गजपति राजू ने बताया कि एयर इंडिया में फिलहाल विनिवेश नहीं होगा। पहले कोशिश की जाएगी कि इसके प्रबंधन को पेशेवर बनाया जाए, ताकि इसका कामकाज सुधरे और कंपनी की आर्थिक हालत ठीक हो। यदि यह प्रयास सफल होता है, तो फिर इसके निजीकरण की जरूरत ही नहीं पड़ेगी।
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हालांकि उन्होंने इससे भी इनकार नहीं किया कि आगे चलकर एयर इंडिया का निजीकरण नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि एयर इंडिया के निजीकरण के बारे में कई विशेषज्ञ समिति की तरफ से सिफारिशें आ चुकी हैं।
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उन्होंने बताया कि पवन हंस लिमिटेड में विनिवेश की प्रक्रिया शीघ्र ही शुरू कर दी जाएगी। इसके लिए वित्त मंत्रालय के विनिवेश विभाग के पास शीघ्र ही प्रस्ताव भेज दिया जाएगा। जहां तक विमानपत्तन प्राधिकरण की बात है, तो उसके विनिवेश की प्रक्रिया शुरू करने में थोड़ी देरी होगी। क्योंकि इस समय एएआई से एयर ट्रैफिक कंट्रोल को अलग करने की प्रक्रिया चल रही है।

एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाए, तो फिर विनिवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि जयपुर और अहमदाबाद हवाई अड्डों को सरकारी निजी भागीदारी (पीपीपी) फार्मूले पर विकसित करने के लिए फैसला लिया जा चुका है, जबकि पहले से ही विकसित किये जा चुके चेन्नई और कोलकाता हवाई अड्डों का प्रबंधकीय नियंत्रण किसी निजी कंपनी को सौंपा जाएगा।

नागरिक उड्डयन मंत्री का कहना है कि एएआई के सूचीबद्ध हो जाने से इस कंपनी के कामकाज में और सुधार होगा और इसमें पारदर्शिता भी आएगी। पवन हंस के विनिवेश और सूचीबद्ध होने से भी इसी उद्देश्य की पूर्ति होगी। उल्लेखनीय है कि एएआई मिनी रत्न श्रेणी की सरकारी कंपनी है।


मुनाफे में चलने वाले इस उपक्रम के पास इस समय देशभर में 125 हवाई अड्डों के संचालन और प्रबंधन का जिम्मा है। इन हवाई अड्डों में से 11 अंतरराष्ट्रीय दर्जा प्राप्त हैं, जबकि 81 पर सिर्फ घरेलू उड़ानों का संचालन होता है। आठ हवाई अड्डों पर कस्टम क्लियरेंस की भी सुविधा है।

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