किसानों के लिए अच्छी खबर,गेहूं आयात पर लगा शुल्क
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देश में किसानों से गेहूं की खरीद के गिरते ग्राफ को ध्यान में रखते हुए सरकार ने गेहूं के आयात पर 10 फीसदी शुल्क लगाने का फैसला किया है। वित्त मंत्रालय की तरफ से इस मामले में अधिसूचना जारी कर दी गई।
आठ साल के लंबे अंतराल के बाद सरकार ने गेहूं के आयात पर शुल्क लगाया है। फिलहाल गेहूं के आयात पर कोई शुल्क नहीं था। अधिसूचना के मुताबिक 10 फीसदी का शुल्क आगामी 31 मार्च तक मान्य होगा। इस आयात शुल्क से सरकार को 90 करोड़ रुपये के राजस्व की प्राप्ति होगी।
सरकार का मानना है कि देश में गेहूं का पर्याप्त स्टॉक है। पिछले सात साल से गेहूं की बंपर फसल होने की वजह से देश में गेहूं की कोई कमी नहीं है।
ऐसे में निजी फर्मों की तरफ से विदेश से गेहूं की खरीदारी होने से यह माना जाने लगा है कि सरकार किसानों की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। पिछले महीने गेहूं पर आयात शुल्क लगाने के मामले में वित्त मंत्रालय के साथ वाणिज्य मंत्रालय, कृषि मंत्रालय के बीच बैठक की गई थी।
इस साल जून में निजी कंपनियों ने आस्ट्रेलिया से 5 लाख टन गेहूं की खरीदारी के लिए करार किया था।
यह कदम किसानों के हित में
इस करार के बाद सरकार की काफी आलोचना की गई कि सरकार किसानों के हित का ख्याल नहीं रख रही है। विदेश से गेहूं खरीदारी में बंदरगाह के नजदीक स्थित आटा मिल काफी अधिक रुचि ले रही हैं।
इस साल बेमौसम बरसात की वजह से गेहूं की फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। इसलिए पास्ता व पिज्जा में इस्तेमाल होने वाले अधिक प्रोटीन वाले आटे के लिए गेहूं के आयात में बढ़ोतरी हो रही है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार जल्द से जल्द गेहूं के आयात पर शुल्क लगाना चाहती थी क्योंकि हाल ही में फ्रांस से बांग्लादेश आने वाले 52,500 टन गेहूं को बांग्लादेश ने गुणवत्ता के आधार पर लेने से मना कर दिया।
अब इस बात की आशंका है कि फ्रांस उस गेहूं को किसी तरीके से भारत में बेचने की कोशिश कर सकता है।
वहीं जानकार मानते हैं कि देश गेहूं की पैदावार तो हो रही है लेकिन उसकी गुणवत्ता ठीक न होने के कारण कंपनियां गेहूं विदेश से आयात करती हैं अब अगर कंपनियां आयात जारी रखती हैं तो जाहिर है वह महंगा होगा और देश में पैक्ड आटा और ब्रेड के दाम बढ़ जाएंगे।