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चीनी को नियंत्रण मुक्त करने की कोशिशें तेज
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 06 Feb 2013 11:43 PM IST
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चीनी उद्योग को नियंत्रण मुक्त करने की दिशा में खाद्य मंत्रालय ने कोशिशें तेज कर दी हैं। बजट से पहले सरकार इस मामले पर बनी रंगराजन समिति की कुछ अहम सिफारिशों को लागू करने का फैसला कर सकती है। बजट में चीनी उद्योग के हितों को ध्यान में रखते हुए कोई घोषणा किए जाने की उम्मीद भी बढ़ गई है।
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मंत्रालय से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों के साथ बातचीत चल रही है। जल्द ही रंगराजन समिति की कुछ सिफारिशों को लागू करने का प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट को भेजने की तैयारी है। यह प्रस्ताव इस सप्ताह ही कैबिनेट को जा सकता है।
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मंत्रालय रिलीज मैकेनिज्म की अवधि चार महीने से बढ़ाकर छह महीने करने और लेवी कोटे की बाध्यता को खत्म पर गंभीरता से विचार कर रहा है। रंगराजन समिति ने इन दोनों व्यवस्थाओं को पूरी तरह समाप्त करने का सुझाव दिया था।
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लेकिन सरकार लेवी कोटे को खत्म करने से पहले पीडीएस के लिए बाजार भाव पर चीनी की खरीद से पैदा स्थितियों का आकलन करना चाहती है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इसमा) के महानिदेशक अबिनाश वर्मा का कहना है कि 10 फीसदी लेवी कोटे की बाध्यता के चलते चीनी मिलों को सालाना करीब 3 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस तरह के नियंत्रण हटने से मिलें अपनी बिक्री और स्टॉक को अपनी जरूरतों के हिसाब से प्रबंध कर पाएंगी।
गौरतलब है कि पीडीएस के तहत सस्ती दरों पर चीनी बेचने के लिए सरकार मिलों से उनकी 10 फीसदी चीनी करीब 20 रुपये प्रति किग्रा की दर से खरीदती है। जबकि रिलीज मैकेनिज्म के तहत खुले बाजार में बेची जाने वाली चीनी की मात्रा तय होती है। चीनी उद्योग लंबे समय से इस तरह के नियंत्रण हटाने की मांग कर रहा है।