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प्रोजेक्ट क्लीयरेंस में तेजी लाए सरकार
नई दिल्ली / प्रशांत श्रीवास्तव
Updated Sun, 06 Jul 2014 09:23 PM IST
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अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए अटकी हुई परियोजनाओं को मंजूरी देने में तेजी लाने से लेकर इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र को बूस्ट देने जैसे कदम मोदी सरकार को जल्द उठाने होंगे। इस समय रुपये और उपभोक्ता दोनों ही के सेंटीमेंट को मजबूत करने की जरूरत है। यदि आने वाले समय में इन कदमों के साथ ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव की जगह स्थायित्व आता है, तो अर्थव्यवस्था में तेजी लाना कहीं आसान हो जाएगा। ऐसा एलएंडटी फाइनेंस होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के प्रेसिडेंट और होल टाइम डायरेक्टर एन शिवरामन का मानना है। पेश है अमर उजाला के प्रशांत श्रीवास्तव की शिवरामन के साथ बातचीत के मख्य अंश-
प्रश्न- मोदी सरकार को अर्थव्यवस्था पटरी पर लाने के लिए किस तरह के कदम उठाने चाहिए ?
उत्तर- सबसे पहले अटके प्रोजेक्ट को शुरू करने में आ रही बाधाओं को दूर करने की जरूरत है। सरकार को प्रोजेक्ट क्लीयरेंस में तेजी लानी चाहिए। पिछले 18 से 24 महीने में ट्रांसपोर्टेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। इस दिशा में काम करने की जरूरत है। माहौल सुधारने के लिए जरूरी है कि सरकार क्रांट्रेक्टर्स के सार्वजनिक उपक्रमों के साथ भुगतान को लेकर जो भी मसले हैं उन्हें जल्द खत्म करे।
प्रश्न- हाल ही में सरकार ने उत्पाद शुल्क में जारी कटौती को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया है, इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर- उत्पाद शुल्क में कटौती को बरकरार रखना इस बात का संकेत है कि सरकार मान रही है कि अगले कुछ महीनों में अर्थव्यवस्था रिकवरी को ओर तेजी से बढ़ेगी। निश्चित तौर पर यह कदम उपभोक्ताओं के लिए भी सकारात्मक है।
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प्रश्न- पिछले दो साल से ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो रही है, क्या आपको लगता है कि अब दरों में कटौती होना जरूरी है?
उत्तर- हम उम्मीद करते हैं कि ब्याज दरों में स्थायित्व आएगा। हमारे लिए रुपये का कमजोर होना ज्यादा जोखिम भरा है। रुपये में मजबूती आना बहुत जरूरी है। मेरा मानना है कि स्थायी ब्याज दर और मजबूत खपत का दौर निवेश को बढ़ाएगा। भारतीय अर्थव्यवस्था उधार आधारित नहीं है। ऐसे में ब्याज दरों में कटौती होने से ज्यादा उसका स्थायी होना जरूरी है।
प्रश्न- कंपनी किन क्षेत्रों में कारोबार बढ़ाने पर जोर दे रही है, आगे की क्या योजनाएं हैं?
उत्तर- ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से मांग बढ़ी है। हाउसिंग सेक्टर, दुपहिया, कार , ट्रैक्टर और माइक्रोफाइनेंस का कारोबार बीते वित्त वर्ष 11 फीसदी की दर से बढ़ा है। कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में फाइनेसिंग पर खास तौर से जोर दे रही है। इस क्षेत्र में अगले पांच साल में एक खरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इसे देखते हुए यह कारोबार के लिए बड़ा क्षेत्र होगा। मार्च 2014 तक कंपनी ने 6,800 करोड़ रुपये के कर्ज इन्फ्रा परियोजनाओं को वितरित किए हैं।
प्रश्न-आरबीआई फिर से बैंकिंग लाइसेंस देने की तैयारी में हैं, ऐसे में क्या आप दोबारा लाइसेंस के लिए आवेदन करेंगे?
उत्तर-पिछली बार लाइसेंस न मिलने से हमें निराशा हुई थी, लेकिन हम बैंक खोलने की चाहत रखते हैं। रिजर्व बैंक के नए निर्देशों का हम इंतजार कर रहे हैं। हम न केवल भौगोलिक रूप से अपना विस्तार कर रहे हैं, बल्कि कारोबार भी बढ़ा रहे हैं, जिससे कि हम अपने संचालन खर्च को नियंत्रण में रख कर अपना रिटर्न बढ़ा सके।
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प्रश्न- मोदी सरकार को अर्थव्यवस्था पटरी पर लाने के लिए किस तरह के कदम उठाने चाहिए ?
उत्तर- सबसे पहले अटके प्रोजेक्ट को शुरू करने में आ रही बाधाओं को दूर करने की जरूरत है। सरकार को प्रोजेक्ट क्लीयरेंस में तेजी लानी चाहिए। पिछले 18 से 24 महीने में ट्रांसपोर्टेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। इस दिशा में काम करने की जरूरत है। माहौल सुधारने के लिए जरूरी है कि सरकार क्रांट्रेक्टर्स के सार्वजनिक उपक्रमों के साथ भुगतान को लेकर जो भी मसले हैं उन्हें जल्द खत्म करे।
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प्रश्न- हाल ही में सरकार ने उत्पाद शुल्क में जारी कटौती को 31 दिसंबर तक बढ़ा दिया है, इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर- उत्पाद शुल्क में कटौती को बरकरार रखना इस बात का संकेत है कि सरकार मान रही है कि अगले कुछ महीनों में अर्थव्यवस्था रिकवरी को ओर तेजी से बढ़ेगी। निश्चित तौर पर यह कदम उपभोक्ताओं के लिए भी सकारात्मक है।
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प्रश्न- पिछले दो साल से ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो रही है, क्या आपको लगता है कि अब दरों में कटौती होना जरूरी है?
उत्तर- हम उम्मीद करते हैं कि ब्याज दरों में स्थायित्व आएगा। हमारे लिए रुपये का कमजोर होना ज्यादा जोखिम भरा है। रुपये में मजबूती आना बहुत जरूरी है। मेरा मानना है कि स्थायी ब्याज दर और मजबूत खपत का दौर निवेश को बढ़ाएगा। भारतीय अर्थव्यवस्था उधार आधारित नहीं है। ऐसे में ब्याज दरों में कटौती होने से ज्यादा उसका स्थायी होना जरूरी है।
प्रश्न- कंपनी किन क्षेत्रों में कारोबार बढ़ाने पर जोर दे रही है, आगे की क्या योजनाएं हैं?
उत्तर- ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से मांग बढ़ी है। हाउसिंग सेक्टर, दुपहिया, कार , ट्रैक्टर और माइक्रोफाइनेंस का कारोबार बीते वित्त वर्ष 11 फीसदी की दर से बढ़ा है। कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में फाइनेसिंग पर खास तौर से जोर दे रही है। इस क्षेत्र में अगले पांच साल में एक खरब डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इसे देखते हुए यह कारोबार के लिए बड़ा क्षेत्र होगा। मार्च 2014 तक कंपनी ने 6,800 करोड़ रुपये के कर्ज इन्फ्रा परियोजनाओं को वितरित किए हैं।
प्रश्न-आरबीआई फिर से बैंकिंग लाइसेंस देने की तैयारी में हैं, ऐसे में क्या आप दोबारा लाइसेंस के लिए आवेदन करेंगे?
उत्तर-पिछली बार लाइसेंस न मिलने से हमें निराशा हुई थी, लेकिन हम बैंक खोलने की चाहत रखते हैं। रिजर्व बैंक के नए निर्देशों का हम इंतजार कर रहे हैं। हम न केवल भौगोलिक रूप से अपना विस्तार कर रहे हैं, बल्कि कारोबार भी बढ़ा रहे हैं, जिससे कि हम अपने संचालन खर्च को नियंत्रण में रख कर अपना रिटर्न बढ़ा सके।