{"_id":"f8ae3266-407d-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"government-will-not-lend-in-this-fiscal-says-chidambaram","type":"story","status":"publish","title_hn":"चालू वित्तवर्ष में और उधार नहीं लेगी सरकार: चिदंबरम","category":{"title":"Business archives","title_hn":"बिज़नेस आर्काइव","slug":"business-archives"}}
चालू वित्तवर्ष में और उधार नहीं लेगी सरकार: चिदंबरम
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Fri, 07 Dec 2012 08:24 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चालू वित्तवर्ष की अवधि में कोई भी अतिरिक्त उधारी लेने से इनकार करते हुए वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि सरकार मौजूदा सीमा के अंतर्गत ही बढ़े हुए खर्चों को समायोजित करने में सक्षम है।
संसद के बाहर संवाददाताओं को चिदंबरम ने बताया कि 28,500 करोड़ रुपये की पेट्रोलियम सब्सिडी, एयर इंडिया में करीब 2,000 करोड़ रुपये की इक्विटी देना और कुछ छोटे खर्चों पर 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय है।
उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि सरकार इस राशि को अपनी मौजूदा उधारी सीमा के अंतर्गत समायोजित कर सकती है। उन्होंने कहा कि हमें नहीं लगता कि इस समय हमें इन खर्चों के लिए और उधारी लेने की जरूरत है।
विज्ञापन
खर्चे और कमाई के बीच के अंतर को पाटने के लिए सरकार ने चालू वित्तवर्ष के दौरान 5.7 लाख करोड़ रुपये की उधारी का अनुमान लगाया था।
वित्तमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि वित्तीय घाटा बढ़कर जीडीपी का 5.3 फीसदी तक हो सकता है, जबकि चालू वित्तवर्ष के लिए इसका बजटीय अनुमान 5.1 फीसदी था।
वित्तवर्ष 2012-13 की पहली छमाही में ही वित्तीय घाटा बढ़कर 3.37 लाख करोड़ रुपये तक हो गया है, जो बजटीय अनुमान का 65.6 फीसदी है।
सरकार गत 30 सितंबर को समाप्त छमाही तक ही 3.7 लाख करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। यह कुल अनुमानित उधारी का 65 फीसदी है।
विज्ञापन
संसद के बाहर संवाददाताओं को चिदंबरम ने बताया कि 28,500 करोड़ रुपये की पेट्रोलियम सब्सिडी, एयर इंडिया में करीब 2,000 करोड़ रुपये की इक्विटी देना और कुछ छोटे खर्चों पर 300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि हमारा मानना है कि सरकार इस राशि को अपनी मौजूदा उधारी सीमा के अंतर्गत समायोजित कर सकती है। उन्होंने कहा कि हमें नहीं लगता कि इस समय हमें इन खर्चों के लिए और उधारी लेने की जरूरत है।
विज्ञापन
खर्चे और कमाई के बीच के अंतर को पाटने के लिए सरकार ने चालू वित्तवर्ष के दौरान 5.7 लाख करोड़ रुपये की उधारी का अनुमान लगाया था।
वित्तमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि वित्तीय घाटा बढ़कर जीडीपी का 5.3 फीसदी तक हो सकता है, जबकि चालू वित्तवर्ष के लिए इसका बजटीय अनुमान 5.1 फीसदी था।
वित्तवर्ष 2012-13 की पहली छमाही में ही वित्तीय घाटा बढ़कर 3.37 लाख करोड़ रुपये तक हो गया है, जो बजटीय अनुमान का 65.6 फीसदी है।
सरकार गत 30 सितंबर को समाप्त छमाही तक ही 3.7 लाख करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। यह कुल अनुमानित उधारी का 65 फीसदी है।