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सरकार पर 9.3 करोड़ नए गरीबों का बोझ

Mon, 07 Jul 2014 09:31 PM IST
अजीत सिंह / अमर उजाला दिल्ली
अजीत सिंह / अमर उजाला दिल्ली Updated Mon, 07 Jul 2014 09:31 PM IST
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government will face burden of 9.3 crore new poor.

गरीबी रेखा को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। रंगराजन समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, यूपीए सरकार ने गरीबी रेखा को काफी नीचे रखा था। जिससे करीब 9.32 करोड़ लोग गरीबी रेखा से वंचित रहे। समिति ने शहरों में रोजाना 47 रुपये और ग्रामीण इलाकों में 32 रुपये से कम खर्च करने वालों को गरीब माना है। इससे देश में 9.32 करोड़ नए लोग गरीबी रेखा के दायरे में आ जाएंगे। अगर सरकार इस गरीबी रेखा को स्वीकार करती है, तो सरकारी खजाने और कई कल्याणकारी योजनाओं पर इन नए गरीबों का बोझ पड़ेगा।

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प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य रहे प्रो. वीएम व्यास का कहना है केंद्र और राज्य सरकारें बीपीएल परिवारों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चला रही हैं। आवास, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा की योजनाओं का लाभ सबसे पहले बीपीएल परिवारों को दिया जाता है। बीपीएल आबादी में नौ करोड़ नए लोग जुडऩे से सरकार को इन्हें कई तरह की सुविधाएं और रियायतें मुहैया करानी होंगी। गौरतलब है कि यूपीए सरकार ने सुरेश तेंदुलकर समिति की सिफारिशों के आधार पर शहरों में 33 रुपये और गांव में 27 रुपये के खर्च को गरीबी रेखा माना था। इतनी नीची गरीबी रेखा को लेकर यूपीए सरकार की कड़ी आलोचना हुई थी। जिसके बाद सी. रंगराजन समिति को गरीबी रेखा तय करने का काम सौंपा गया था।
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खाद्य सुरक्षा कानून पर पड़ेगा असर
गरीबी रेखा ऊपर उठने का सबसे पहला असर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत होने वाले आवंटन पर पड़ सकता है। अभी तक केंद्र सरकार 21.9 फीसदी यानी करीब २७ करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से नीचे मानती थी। लेकिन रंगराजन समिति के मुताबिक वर्ष 2011-12 में 29.5 फीसदी यानी 36.3 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे आते हैं। खाद्य सुरक्षा कानून में राज्यों को अनाज का आवंटन बीपीएल आबादी के आधार पर हुआ है। अब नई गरीबी रेखा लागू होने से यह आवंटन भी प्रभावित होगा।
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इंटरनेशनल फंडिंग पर असर नहीं
गरीबी रेखा बदलने से भले ही एक झटके में बीपीएल आबादी 35 फीसदी बढ़ गई है, लेकिन इससे भारत को मिलने वाली इंटरनेशनल फंडिंग प्रभावित नहीं होगी।

राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य एनसी सक्सेना का कहना है कि अंतरराष्टïरीय फंडिंग वल्र्ड बैंक की ओर से तय 1.25 डॉलर की गरीबी रेखा के आधार पर होती है, जो क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर भारत के लिए करीब 35 रुपये बैठती है। इस लिहाज से रंगराजन समिति की गरीबी रेखा वल्र्ड बैंक की गरीबी रेखा के काफी करीब है।

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