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जीएसटी बिल 12 के बाद पेश कर सकती है सरकार
नई दिल्ली/ ब्यूरो
Updated Tue, 02 Dec 2014 09:21 AM IST
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देश में बड़े आर्थिक सुधारों और एक स्थिर कर प्रणाली के लिए उभरती आवाजों के बीच मोदी सरकार बहुप्रतीक्षित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) अधिनियम को संसद के शीत कालीन सत्र में पेश करने के लिए कमर कस चुकी है। जीएसटी बिल को 12 दिसंबर के बाद सदन में पेश किया जा सकता है।
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जीएसटी बिल को 12 दिसंबर को होने वाली राज्यों के वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति की बैठक में पेश किया जाएगा। उम्मीद है कि इसी दौरान केंद्र सरकार बिल पर राज्यों की सारी आपत्तियों का समाधान करते हुए इसे संसद में पेश करने की राह साफ कर लेगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि हम जीएसटी बिल को हम संसद के चालू सत्र में पेश करने की कोशिश करेंगे। जीएसटी बिल को 12 दिसंबर को होने वाली राज्यों के वित्त मंत्रियों की समिति की बैठक के बाद संसद में पेश किया जाएगा।
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सरकार जीएसटी को 1 अप्रैल 2016 से पूरे देश में लागू करना चाहती है। जीएसटी लागू होने के बाद देश कर प्रणाली में बड़े सुधार की उम्मीद की जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि अगर संसद के शीत कालीन सत्र में ही वह जीएसटी बिल को पास कराने में कामयाब रहती है, तो वह इस नए कर कानून को अप्रैल 2016 के उसके तयशुदा वक्त से पहले ही लागू कर सकेगी।
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हालांकि इसे लागू करने के लिए विधेयक को संसद में पारित होने के बाद कम से कम 19 की विधानसभाओं में भी पारित कराना होगा। इसके बाद ही यह विधेयक कानून के रूप में लागू किया जा सकेगा।
जीएसटी के लागू हो जाने पर केंद्र सरकार की ओर से लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क व सेवा कर और राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला मूल्य वर्धित कर (वैट) खत्म हो जाएगा। यह सभी कर जीएसटी में समाहित हो जाएंगे। इसी के चलते राज्यों और केंद्र सरकार के बीच जीएसटी की दर, खासकर पेट्रोलियम और शराब पर कर को लेकर विभिन्न मुद्दों पर असहमति है।
जीएसटी पर गठित उपसमिति ने 27 फीसदी की एक समान दर का प्रस्ताव किया है। हालांकि राज्यों को अभी इस पर फैसला करना है। एक प्रस्ताव जीएसटी में राज्य की हिस्सेदारी 13.91 फीसदी और केंद्र की 12.77 फीसदी रखने का प्रस्ताव है। गौरतलब है कि 2011 में यूपीए सरकार द्वारा पेश संसद में पेश किया गया जीएसटी बिल लैप्स हो चुका है। इसलिए मोदी सरकार को इस विधेयक को नए सिरे से संसद में पेश करना होगा।